मुखर्जी उद्यान की बदहाली बनी चिंता का विषय
आधा पार्क अंधेरे में, बंद लाइटों ने बढ़ाई हादसों की आशंका, टॉय ट्रेन भी बनी शोपीस

शाहपुरा। शहर के प्रमुख सार्वजनिक स्थलों में शामिल भीलवाड़ा रोड स्थित मुखर्जी उद्यान इन दिनों अपनी बदहाल व्यवस्थाओं के कारण चर्चा का विषय बना हुआ है। नगर पालिका कार्यालय से कुछ ही दूरी पर स्थित इस उद्यान का आधा हिस्सा शाम ढलते ही अंधेरे में डूब जाता है। पार्क में लगी कई विद्युत लाइटें लंबे समय से बंद पड़ी हैं, जिससे यहां घूमने आने वाले सैकड़ों नागरिकों की सुरक्षा भगवान भरोसे है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो अंधेरे की आड़ में कभी भी कोई बड़ा हादसा या अप्रिय घटना हो सकती है।
मुखर्जी उद्यान शाहपुरा शहर का सबसे प्रमुख और आकर्षक पार्क माना जाता है। यहां प्रतिदिन सुबह और शाम सैकड़ों की संख्या में महिलाएं, युवतियां, बच्चे, बुजुर्ग और युवा स्वास्थ्य लाभ के लिए सैर करने तथा परिवार के साथ समय बिताने पहुंचते हैं। लेकिन सूर्यास्त के बाद उद्यान का एक बड़ा हिस्सा पूरी तरह अंधेरे में डूब जाने से लोगों के मन में भय का माहौल बन जाता है। विशेषकर महिलाओं और बच्चों को असुरक्षा का एहसास होता है।
टॉय ट्रेन बनी सिर्फ यादें, पूरा क्षेत्र अंधेरे में
उद्यान का सबसे आकर्षक केंद्र रही टॉय ट्रेन लंबे समय से बंद पड़ी है। बच्चों के चेहरे पर मुस्कान बिखेरने वाली यह ट्रेन अब केवल शोपीस बनकर रह गई है। जिस हिस्से में टॉय ट्रेन संचालित होती थी, वहां की लगभग सभी लाइटें भी बंद हैं। परिणामस्वरूप यह पूरा क्षेत्र रात होते ही सुनसान और अंधकारमय हो जाता है।
बच्चों के मनोरंजन के लिए लगाए गए झूले और खेल उपकरण भी कई स्थानों पर टूटे-फूटे पड़े हैं। कई खिलौनों की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि उन पर खेलना जोखिम भरा हो गया है। अभिभावकों का कहना है कि यदि कोई बच्चा इन टूटे उपकरणों पर खेलते समय गिर जाए तो गंभीर चोट लग सकती है।

शौचालय में भी अंधेरा, महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी
उद्यान में बने सार्वजनिक शौचालय की लाइटें भी बंद पड़ी हैं। शाम के समय वहां जाने वाले लोगों को मोबाइल की रोशनी का सहारा लेना पड़ता है। महिलाओं और बुजुर्गों के लिए यह स्थिति बेहद असुविधाजनक और असुरक्षित है। स्वच्छता और सुरक्षा के लिहाज से भी यह गंभीर लापरवाही मानी जा रही है।
अंधेरे की आड़ में कभी भी हो सकती है अप्रिय घटना
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पार्क में पर्याप्त रोशनी नहीं होने के कारण असामाजिक तत्वों की गतिविधियों की आशंका बनी रहती है। अंधेरे में चोरी, छीना-झपटी, महिलाओं से अभद्रता अथवा अन्य आपराधिक घटनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता। वहीं अंधेरे के कारण लोग टूटे हुए झूलों, उभरे हुए रास्तों अथवा अन्य बाधाओं से टकराकर घायल भी हो सकते हैं।
नियमित रूप से मॉर्निंग और इवनिंग वॉक करने वाले लोगों ने बताया कि कई बार उन्होंने नगर पालिका को बंद लाइटों और अन्य अव्यवस्थाओं की जानकारी दी, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया। नगर पालिका कार्यालय के समीप स्थित पार्क की ऐसी हालत प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर रही है।

करोड़ों की सुविधाएं, लेकिन रखरखाव में लापरवाही
शहरवासियों का कहना है कि उद्यान के सौंदर्यीकरण और विकास पर समय-समय पर लाखों रुपये खर्च किए गए, लेकिन रखरखाव के अभाव में सुविधाएं धीरे-धीरे समाप्त होती जा रही हैं। टॉय ट्रेन बंद है, खेल उपकरण टूट चुके हैं, कई स्थानों पर लाइटें खराब हैं और नियमित निगरानी का भी अभाव दिखाई देता है। इससे पार्क की सुंदरता और उपयोगिता दोनों प्रभावित हो रही हैं।
रोज पहुंचते हैं सैकड़ों लोग
मुखर्जी उद्यान केवल मनोरंजन का स्थल नहीं, बल्कि शहरवासियों के स्वास्थ्य और सामाजिक मेल-मिलाप का प्रमुख केंद्र भी है। यहां प्रतिदिन सुबह योग करने वाले समूह, मॉर्निंग वॉकर्स, शाम को परिवारों के साथ आने वाले नागरिक, बच्चों की किलकारियां और बुजुर्गों की बैठकी देखने को मिलती है। ऐसे में पार्क की मूलभूत सुविधाओं का सुचारु रहना अत्यंत आवश्यक है।
नगर पालिका से की जा रही ये मांगें
शहरवासियों ने नगर पालिका प्रशासन से मांग की है कि—
- उद्यान की बंद पड़ी सभी लाइटों को तत्काल चालू कराया जाए।
- टॉय ट्रेन को दोबारा शुरू करने की दिशा में ठोस पहल की जाए।
- टूटे हुए झूलों एवं खेल उपकरणों की मरम्मत या उन्हें बदला जाए।
- शौचालय में पर्याप्त रोशनी और स्वच्छता की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
- शाम के समय नियमित सुरक्षा गश्त और निगरानी बढ़ाई जाए।
- पार्क के रखरखाव के लिए नियमित निरीक्षण व्यवस्था लागू की जाए।
समय रहते जागे प्रशासन
नगर पालिका कार्यालय के पास स्थित मुखर्जी उद्यान की बदहाल स्थिति प्रशासन के लिए चिंता का विषय होनी चाहिए। यदि समय रहते बंद लाइटें चालू नहीं कराई गईं और अन्य सुविधाओं को दुरुस्त नहीं किया गया तो किसी भी दिन कोई अप्रिय घटना घट सकती है। शहरवासियों का कहना है कि वे केवल विकास के दावे नहीं, बल्कि धरातल पर सुरक्षित, स्वच्छ और व्यवस्थित उद्यान देखना चाहते हैं। अब देखना यह होगा कि नगर पालिका इस गंभीर समस्या पर कितनी जल्दी संज्ञान लेकर मुखर्जी उद्यान की खोई हुई रौनक लौटाने में सफल होती है।




