वनवासी अंचलों में पहुंचेगा आस्था का प्रकाश: 51 हनुमान प्रतिमाएं, 51 रामचरितमानस व 2000 हनुमान चालीसा रवाना
भीलवाड़ा से शुरू हुआ सनातन संस्कृति संवर्धन अभियान, डूंगरपुर-बांसवाड़ा सहित वनवासी क्षेत्रों में होगी स्थापना; वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुआ पूजन

भीलवाड़ा। सनातन संस्कृति के संरक्षण और वनवासी क्षेत्रों में धार्मिक एवं सांस्कृतिक चेतना के विस्तार की दिशा में गुरुवार को भीलवाड़ा से एक महत्वपूर्ण अभियान का शुभारंभ हुआ। हरि शेवा उदासीन आश्रम सनातन मंदिर में महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन महाराज के सानिध्य में आयोजित कार्यक्रम में राधेरमन/गीतांजलि इंटरप्राइजेज के चितवन व्यास की ओर से भारत माता भक्ति धाम को तीन फीट ऊंचाई की 51 भगवान हनुमान की प्रतिमाएं, 51 रामचरितमानस तथा 2000 हनुमान चालीसा भेंट की गईं। वैदिक मंत्रोच्चार एवं धार्मिक अनुष्ठानों के बीच पूजन-अर्चन के उपरांत इन प्रतिमाओं और धार्मिक ग्रंथों को डूंगरपुर, बांसवाड़ा एवं आसपास के वनवासी अंचलों के लिए रवाना किया गया।
कार्यक्रम में पूरे परिसर का वातावरण भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रहा। पंडित सत्यनारायण शर्मा एवं अन्य विद्वान आचार्यों ने विधि-विधान से प्रतिमाओं का पूजन-अर्चन कराया। संत-महात्माओं और श्रद्धालुओं ने भगवान हनुमान का जयघोष करते हुए अभियान की सफलता एवं समाज में धार्मिक चेतना के प्रसार की कामना की।

महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन महाराज ने कहा कि वनवासी समाज भारत की सनातन सांस्कृतिक परंपरा का अभिन्न अंग है। इन क्षेत्रों में मंदिरों की स्थापना केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि सामाजिक समरसता, संस्कार, शिक्षा, सेवा और सांस्कृतिक जागरण का केंद्र भी बनती है। उन्होंने कहा कि भगवान हनुमान शक्ति, सेवा, समर्पण और राष्ट्रभक्ति के प्रतीक हैं। उनकी प्रतिमाओं की स्थापना से गांवों में नियमित पूजा-अर्चना, सुंदरकांड, रामायण पाठ, भजन-कीर्तन एवं धार्मिक आयोजनों का वातावरण बनेगा, जिससे नई पीढ़ी अपने सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़ सकेगी।
उन्होंने बताया कि हँसगंगा हरिशेवा चैरिटेबल ट्रस्ट एवं हरि शेवा धर्मशाला द्वारा चलाए जा रहे इस सेवा अभियान के तहत प्रथम चरण में 61 हनुमान प्रतिमाएं वनवासी क्षेत्रों के लिए भेजी जा चुकी हैं। दूसरे चरण में 51 प्रतिमाएं, 51 रामचरितमानस और 2000 हनुमान चालीसा भेजी गई हैं। आगामी चरणों में भी आवश्यकता के अनुरूप धार्मिक सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि अधिक से अधिक गांवों तक यह अभियान पहुंच सके।
बांसवाड़ा परियोजना के प्रमुख प्रचारक धर्मराज जी भाईसाहब इस संपूर्ण अभियान का समन्वय कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि डूंगरपुर, बांसवाड़ा एवं आसपास के वनवासी क्षेत्रों में स्थानीय जनसहभागिता के साथ प्रतिमाओं की स्थापना की जाएगी। प्रत्येक स्थान पर नियमित धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन कर लोगों को भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक परंपराओं और सामाजिक मूल्यों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं ने इस पहल को समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाला अभियान बताते हुए कहा कि धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियां समाज को जोड़ने तथा नई पीढ़ी में नैतिक मूल्यों के विकास का प्रभावी माध्यम बनती हैं। बड़ी संख्या में मौजूद संतों एवं श्रद्धालुओं ने इस सेवा कार्य की सराहना करते हुए इसे जनजागरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
इस अवसर पर महंत स्वरूप दास (अजमेर), महंत हनुमान राम (पुष्कर), महंत तुलसी कलतारी, संत मायाराम, संत राजाराम, संत गोविन्द राम, संत ईशान राम, संत सुयज्ञ राम, संत केशवराम, बालक मिहिर, यश, चाँदमल सोमानी, राधेरमन व्यास, अचल जावलिया, चंद्र लालचंदानी, मिठू नावानी, जयराम अभिचंदानी, वंदना आहूजा, वर्षा अभिचंदानी सहित बड़ी संख्या में संत, श्रद्धालु एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।




