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“अब हर गांव में होगी महिलाओं की सुरक्षा की आवाज़”

शाहपुरा थाने में सुरक्षा सखी बैठक, कानून से लेकर आत्मविश्वास तक का मिला पाठ

शाहपुरा। बदलते दौर में महिला सुरक्षा केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक भागीदारी का विषय बन चुकी है। इसी सोच को साकार रूप देने के लिए राजस्थान पुलिस द्वारा संचालित “सुरक्षा सखी” अभियान अब ग्रामीण अंचलों तक मजबूती से पहुंच रहा है। शनिवार को पुलिस थाना शाहपुरा परिसर में आयोजित सुरक्षा सखी बैठक इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुई, जहां महिलाओं को न केवल उनके कानूनी अधिकारों की जानकारी दी गई, बल्कि यह संदेश भी दिया गया कि अब अन्याय सहना नहीं, बल्कि कानून का सहारा लेकर उसका मुकाबला करना ही सशक्त महिला की पहचान है।

बैठक में थाना क्षेत्र की विभिन्न ग्राम पंचायतों से मनोनीत सुरक्षा सखियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम में महिलाओं से जुड़े कानूनों, घरेलू हिंसा, दहेज प्रताड़ना, संपत्ति में अधिकार, भरण-पोषण, पुलिस सहायता एवं कानूनी प्रक्रियाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक का उद्देश्य महिलाओं को जागरूक बनाकर उन्हें समाज में अन्य महिलाओं की मदद के लिए तैयार करना था।

महिलाएं अपने अधिकार जानें, चुप न रहें : सीआई लीलाधर मालवीय

बैठक को संबोधित करते हुए थानाधिकारी (सीआई) लीलाधर मालवीय ने कहा कि आज भी अनेक महिलाएं अपने अधिकारों की जानकारी के अभाव में वर्षों तक घरेलू हिंसा, मानसिक प्रताड़ना, दहेज उत्पीड़न और सामाजिक शोषण का सामना करती रहती हैं। उन्होंने कहा कि कानून महिलाओं को पर्याप्त संरक्षण प्रदान करता है, आवश्यकता केवल उसके सही उपयोग और जागरूकता की है।

सीआई मालवीय ने महिलाओं को बताया कि यदि कोई महिला घरेलू हिंसा, दहेज प्रताड़ना, मारपीट, मानसिक उत्पीड़न, आर्थिक शोषण अथवा किसी भी प्रकार के अपराध का शिकार होती है तो वह बिना किसी भय के पुलिस से संपर्क कर सकती है। उन्होंने महिलाओं को संपत्ति में कानूनी हिस्सेदारी, भरण-पोषण के अधिकार, महिला संरक्षण संबंधी अधिनियमों तथा पुलिस सहायता प्राप्त करने की प्रक्रिया की भी विस्तार से जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि “अत्याचार सहना भी एक प्रकार से अपराध को बढ़ावा देना है। यदि महिलाएं जागरूक होंगी तो समाज स्वतः सुरक्षित और सशक्त बनेगा।”

हर गांव में बनेगी जागरूकता की कड़ी

बैठक में मौजूद सुरक्षा सखियों से आह्वान किया गया कि वे अपने-अपने गांवों और वार्डों में महिलाओं से नियमित संवाद स्थापित करें तथा जरूरतमंद महिलाओं को पुलिस और प्रशासन से जोड़ने का कार्य करें। उन्हें यह भी बताया गया कि यदि किसी महिला के साथ हिंसा या उत्पीड़न की घटना होती है तो उसे न्याय दिलाने में सुरक्षा सखी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी।

सुरक्षा सखी प्रभारी सहायक उपनिरीक्षक ने भी महिलाओं को अभियान के उद्देश्य, कार्यप्रणाली और जिम्मेदारियों से अवगत कराया तथा कहा कि सुरक्षा सखी केवल एक नाम नहीं बल्कि समाज में महिला सुरक्षा का मजबूत जनसंपर्क तंत्र है।

पुलिस मुख्यालय की अभिनव पहल

यह कार्यक्रम जिला पुलिस अधीक्षक सागर राणा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अंजुल कायल तथा वृत्ताधिकारी ओमप्रकाश विश्नोई के निर्देशन में संचालित किया जा रहा है। राजस्थान पुलिस का उद्देश्य है कि प्रत्येक गांव और कस्बे में ऐसी जागरूक महिलाओं का नेटवर्क तैयार किया जाए जो महिलाओं और किशोरियों की समस्याओं को समय रहते पुलिस तक पहुंचा सके तथा अपराध होने से पहले ही उसे रोकने में सहयोग दे।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि महिला सुरक्षा को लेकर केवल कानूनी कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि सामाजिक जागरूकता और विश्वास का वातावरण बनाना भी उतना ही आवश्यक है। इसी सोच के साथ प्रदेशभर में सुरक्षा सखी कार्यक्रम का विस्तार किया जा रहा है।

क्या है ‘सुरक्षा सखी’ अभियान?

राजस्थान पुलिस द्वारा शुरू किया गया “सुरक्षा सखी” अभियान महिलाओं और किशोरियों की सुरक्षा को मजबूत करने की एक अभिनव पहल है। इसके तहत प्रत्येक थाना क्षेत्र में ग्राम पंचायत स्तर पर महिलाओं का एक समूह गठित किया जाता है, जिसे महिला सुरक्षा संबंधी कानूनों, पुलिस व्यवस्था, साइबर अपराध, घरेलू हिंसा, दहेज प्रताड़ना, बाल विवाह, महिला हेल्पलाइन तथा अन्य महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी दी जाती है।

इन सुरक्षा सखियों का कार्य केवल जानकारी प्राप्त करना ही नहीं, बल्कि अपने क्षेत्र की महिलाओं तक उसे पहुंचाना, जरूरत पड़ने पर पीड़ित महिला को पुलिस तक लाना और समाज में महिला सम्मान एवं सुरक्षा का वातावरण तैयार करना भी है।

कौन बन सकती है सुरक्षा सखी?

पुलिस विभाग के अनुसार सुरक्षा सखी के सदस्य संबंधित थाना क्षेत्र के निवासी होते हैं। उनकी आयु 15 वर्ष से 70 वर्ष के बीच निर्धारित की गई है। सदस्य का किसी भी प्रकार का आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होना चाहिए तथा वह किसी संदिग्ध गतिविधि से जुड़ा नहीं होना चाहिए। समाज में सम्मानित एवं सक्रिय महिलाओं को इस अभियान से जोड़कर महिला सुरक्षा की मजबूत सामाजिक श्रृंखला तैयार की जा रही है।

महिला सशक्तिकरण की दिशा में प्रभावी कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाओं को उनके अधिकारों की जानकारी देना ही वास्तविक सशक्तिकरण की पहली सीढ़ी है। जब गांव-गांव में सुरक्षा सखियां सक्रिय होंगी तो घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न, बाल विवाह, छेड़छाड़ और महिलाओं के विरुद्ध होने वाले अन्य अपराधों की समय रहते जानकारी पुलिस तक पहुंचेगी तथा पीड़ित महिलाओं को न्याय मिलने का रास्ता भी आसान होगा।

बैठक के अंत में उपस्थित सुरक्षा सखियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में महिलाओं को जागरूक करने, जरूरतमंद महिलाओं की हरसंभव सहायता करने तथा पुलिस और समाज के बीच एक मजबूत सेतु की भूमिका निभाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में सुरक्षा सखी प्रभारी सहायक उपनिरीक्षक सहित थाना क्षेत्र की अनेक सुरक्षा सखियां उपस्थित रहीं।

राजस्थान पुलिस का यह अभियान स्पष्ट संदेश देता है कि महिलाओं की सुरक्षा केवल कानून का विषय नहीं, बल्कि जागरूक समाज की पहचान भी है। जब हर गांव में एक जागरूक सुरक्षा सखी होगी, तब न केवल अपराधों पर अंकुश लगेगा, बल्कि महिलाओं का आत्मविश्वास भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगा।

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