80 किलोमीटर की तपस्या, 51 कांवड़ों में त्रिवेणी का जल… ईरांस में महाकाल बने महादेव, गूंजे हर-हर भोले के जयकारे

रायला/ईरांस। श्रावण मास के अंतिम सोमवार को ईरांस गांव में भगवान महादेव की भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। जय भोलेनाथ मित्र मंडल के तत्वावधान में निकाली गई 5वीं विशाल कांवड़ यात्रा में शिवभक्तों ने त्रिवेणी संगम से 51 कांवड़ों में पवित्र जल भरा और करीब 80 किलोमीटर की दूरी तीन दिनों में पैदल तय कर ईरांस पहुंचे। कांवड़ यात्रियों के गांव में प्रवेश करते ही माहौल शिवमय हो गया। डीजे की भक्तिमय धुनों के बीच श्रद्धालु नाचते-गाते हुए आगे बढ़े और हर-हर महादेव, बम-बम भोले के जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा।
तीन दिन की पैदल यात्रा, आस्था ने आसान कर दी 80 किलोमीटर की राह
कांवड़ यात्रा में शामिल शिवभक्तों ने त्रिवेणी संगम से पवित्र जल भरा और उसे कांवड़ में लेकर ईरांस के लिए रवाना हुए। करीब 80 किलोमीटर की यह यात्रा तीन दिनों में पैदल पूरी की गई। रास्ते की थकान भी शिवभक्ति के जोश के सामने फीकी पड़ गई। कांवड़ यात्रियों के कदम लगातार आगे बढ़ते रहे और मन में केवल भोलेनाथ का नाम रहा।
तीन दिन बाद जब कांवड़ यात्रियों ने ईरांस की धरती पर कदम रखा तो ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। डीजे की धुनों पर शिवभक्त झूमते नजर आए। युवा और ग्रामीण हर-हर महादेव के जयकारे लगाते हुए कांवड़ यात्रियों के साथ चल रहे थे। गांव में कांवड़ यात्रा के पहुंचने से उत्सव जैसा माहौल बन गया।
पवित्र जल और पंचामृत से हुआ महादेव का अभिषेक
ईरांस पहुंचने के बाद कांवड़ यात्रियों ने त्रिवेणी संगम से लाए पवित्र जल से भगवान महादेव का विधि-विधान से जलाभिषेक किया। इसके साथ ही पंचामृत से भी भगवान शिव का अभिषेक किया गया। जैसे ही पवित्र जल शिवलिंग पर अर्पित हुआ, मंदिर परिसर में हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयकारे गूंजने लगे।
इस दौरान पंडित राकेश शास्त्री ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भगवान महादेव का विधिवत पूजन एवं अभिषेक करवाया। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव के समक्ष क्षेत्र की खुशहाली, परिवार में सुख-समृद्धि और शांति की कामना की।
फूलों, त्रिपुंड और नेत्रों से सजे महादेव, दिखा महाकाल का स्वरूप
जलाभिषेक के बाद भगवान भोलेनाथ के पावन शिवलिंग का भव्य एवं आकर्षक शृंगार किया गया। महादेव को मुखौटा, त्रिपुंड और नेत्रों से सजाया गया। विशेष श्रृंगार के बाद ईरांस महादेव का स्वरूप महाकालेश्वर जैसा अलौकिक नजर आया।
शृंगार में गेंदे के फूलों की आकर्षक मालाएं, मुकुट और धतूरे के फल अर्पित किए गए। फूलों से सजे महादेव के दिव्य स्वरूप के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। भक्तों ने कतार में पहुंचकर श्रद्धापूर्वक दर्शन किए और भगवान शिव का आशीर्वाद लिया।
अंतिम सोमवार पर ईरांस हुआ शिवमय
श्रावण मास के अंतिम सोमवार पर आयोजित कांवड़ यात्रा और जलाभिषेक कार्यक्रम ने ईरांस सहित आसपास के क्षेत्र को पूरी तरह शिवभक्ति में रंग दिया। तीन दिनों तक 80 किलोमीटर पैदल चलकर पहुंचे कांवड़ यात्रियों की तपस्या और श्रद्धा ने आयोजन को विशेष बना दिया।
51 कांवड़ों में त्रिवेणी का पवित्र जल, कदमों में तीन दिन की तपस्या और जुबां पर भोलेनाथ का नाम—इन सबने ईरांस में ऐसा भक्तिमय वातावरण रचा कि हर ओर केवल हर-हर महादेव की गूंज सुनाई देती रही। कांवड़ यात्रा के सफल समापन और महादेव के जलाभिषेक को लेकर शिवभक्तों में विशेष उत्साह रहा।





