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“मोबाइल नहीं, संस्कार बनें विद्यार्थियों की पहचान” — आलोक सेंट्रल स्कूल में गूंजा गजेन्द्र गोपाल शास्त्री का प्रेरक संदेश

शिव महापुराण के प्रख्यात कथावाचक का हुआ आत्मीय स्वागत, विद्यार्थियों को दिए अनुशासन, संस्कार और राष्ट्रसेवा के मंत्र

  • मोबाइल की लत छोड़ो, संस्कारों से भविष्य गढ़ो : गजेन्द्र गोपाल शास्त्री
  • विद्यार्थी केवल डिग्री नहीं, चरित्र भी कमाएं : गजेन्द्र गोपाल शास्त्री
  • संस्कारयुक्त शिक्षा ही राष्ट्र निर्माण का आधार : गजेन्द्र गोपाल शास्त्री
  • मोबाइल से दूरी, संस्कारों से दोस्ती—आलोक सेंट्रल स्कूल में प्रेरक उद्बोधन
  • सफलता का मंत्र: अनुशासन, संस्कार और राष्ट्रभक्ति

शाहपुरा। आलोक सेंट्रल स्कूल, शाहपुरा में शुक्रवार को आध्यात्मिकता, संस्कार और प्रेरणा से ओतप्रोत वातावरण देखने को मिला। श्री शिव महापुराण के प्रख्यात कथावाचक गजेन्द्र गोपाल शास्त्री का विद्यालय परिवार द्वारा गर्मजोशी, श्रद्धा और सम्मान के साथ स्वागत किया गया। इस अवसर पर आयोजित प्रेरक संवाद में शास्त्री जी ने विद्यार्थियों को आधुनिक जीवन की चुनौतियों से सजग रहने, भारतीय संस्कृति को अपनाने तथा अनुशासित जीवन जीने का संदेश दिया।

अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में शास्त्री जी ने कहा कि वर्तमान समय में मोबाइल फोन का अत्यधिक उपयोग विद्यार्थियों की एकाग्रता, अध्ययन क्षमता, मानसिक विकास और पारिवारिक संबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि तकनीक का उपयोग केवल आवश्यकता और ज्ञानवर्धन के लिए करें, न कि समय की बर्बादी और व्यसन के रूप में।

उन्होंने एक आदर्श विद्यार्थी के पाँच प्रमुख लक्षणों का उल्लेख करते हुए बताया कि अनुशासन, परिश्रम, विनम्रता, समय का सदुपयोग और गुरुजनों के प्रति सम्मान ही विद्यार्थी जीवन की वास्तविक पूंजी हैं। इन गुणों को अपनाकर ही कोई छात्र अपने जीवन में सफलता के साथ-साथ समाज और राष्ट्र के लिए भी उपयोगी बन सकता है।

शास्त्री जी ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करना या रोजगार हासिल करना नहीं है। सच्ची शिक्षा वही है, जो व्यक्ति के चरित्र का निर्माण करे, उसमें नैतिक मूल्यों का विकास करे और राष्ट्रहित को सर्वोच्च मानने की प्रेरणा दे। उन्होंने विद्यार्थियों से सनातन संस्कृति के आदर्शों को जीवन में अपनाने, माता-पिता एवं गुरुजनों का सम्मान करने तथा सदैव सत्य, सेवा और सदाचार के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत विश्व की सबसे प्राचीन और समृद्ध विरासतों में से एक है। यदि नई पीढ़ी अपने संस्कारों, संस्कृति और नैतिक मूल्यों से जुड़ी रहेगी, तभी एक सशक्त, जागरूक और विकसित राष्ट्र का निर्माण संभव होगा।

कार्यक्रम के अंत में संस्था प्रधान वीरेंद्र कुमार व्यास ने पूज्य गजेन्द्र गोपाल शास्त्री का विद्यालय पधारने तथा विद्यार्थियों को अपने प्रेरणास्पद विचारों से मार्गदर्शन देने के लिए हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रेरक व्यक्तित्व का सान्निध्य विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और उनके जीवन को नई दिशा प्रदान करता है।

इस अवसर पर उषा शर्मा, सुशील कुमार गोड़, दुर्गालाल धाकड़, शैलेंद्र सिंह राणावत, आरती शर्मा, सुषमा सेन, विष्णु जांगिड़, राजेश सेन, मुकेश तेली, गुड्डी बानो, किशनलाल धाकड़, मुरली बंजारा, देवकिशन कोली, गौतम तिवाड़ी, अंजली शर्मा, चेस्ट शर्मा, अंशिका चेचाणी, आयुष आचार्य, सीताराम गुर्जर, धीरेंद्र पांचाल, खुशबू राठौड़, स्नेहा सेन, नैना पांचाल, फरजाना बानो, सुमन यादव, किरण जांगिड़, पायल नायक, रेखा प्रजापत, दिव्या श्रीवास्तव, हेम कंवर, सुचिता कांटिया सहित विद्यालय का समस्त स्टाफ उपस्थित रहा।

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