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‘मना करो, दूर जाओ, बताओ’: शाहपुरा के स्कूलों में बच्चों को सिखाया सुरक्षा का मंत्र

न्यायिक अधिकारियों ने बताए कानूनी अधिकार -Transformative Tuesdays के तहत तीन विद्यालयों में विधिक साक्षरता शिविर, बाल सुरक्षा और अधिकारों को लेकर विद्यार्थियों से संवाद

शाहपुरा। मूलचन्द पेसवानी

बच्चों की सुरक्षा केवल परिवार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है। इसी सोच को धरातल पर उतारने की दिशा में राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर की ओर से संचालित राज्य स्तरीय कार्यक्रम ‘Transformative Tuesdays’ के तहत शाहपुरा में मंगलवार को विधिक जागरूकता का प्रभावी अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान न्यायिक अधिकारियों और अधिवक्ताओं ने विद्यालयों में पहुंचकर विद्यार्थियों से संवाद किया और उन्हें ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए तैयार किया, जिनमें उनकी सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।

राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, भीलवाड़ा के निर्देशानुसार 1 सितम्बर 2026 को तालुका विधिक सेवा समिति, शाहपुरा के तत्वावधान में विभिन्न विद्यालयों में विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर आयोजित किए गए। कार्यक्रम का मुख्य केंद्र रहा—“अजनबी से सावधान—मना करो, दूर जाओ, बताओ।”

यह केवल तीन शब्दों का संदेश नहीं, बल्कि बच्चों को मुश्किल परिस्थिति में तत्काल निर्णय लेने का सरल और प्रभावी तरीका समझाने वाली सुरक्षा की त्रिस्तरीय सीख रही।

‘मना करो’—अपनी असहमति जाहिर करने में झिझकें नहीं

ब्राइट माइंड स्कूल में आयोजित शिविर में अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश सानिया हाशमी, अधिवक्ता हितेश कुमार शर्मा एवं रामप्रसाद जाट ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए उन्हें समझाया कि किसी अपरिचित व्यक्ति के बहलाने-फुसलाने, किसी प्रकार का प्रलोभन देने अथवा ऐसा व्यवहार करने पर जिससे बच्चा असहज महसूस करे, वहां चुप रहना जरूरी नहीं है।

विद्यार्थियों को स्पष्ट रूप से बताया गया कि ऐसी स्थिति में सबसे पहला कदम है—‘मना करो।’

बच्चों को यह समझाया गया कि अपनी असहमति व्यक्त करना उनका अधिकार है। किसी व्यक्ति का परिचित होना अथवा किसी बड़े का होना इस बात की गारंटी नहीं है कि उसके साथ हर परिस्थिति में जाना या उसकी हर बात मानना सुरक्षित है। इसलिए यदि कोई व्यवहार असहज लगे तो बच्चे को बिना झिझक ‘नहीं’ कहने का साहस रखना चाहिए।

‘दूर जाओ’—खतरे को पहचानकर सुरक्षित स्थान तक पहुंचना जरूरी

अभियान का दूसरा संदेश ‘दूर जाओ’ बच्चों के लिए व्यावहारिक सुरक्षा उपाय के रूप में सामने आया। न्यायिक अधिकारियों एवं अधिवक्ताओं ने विद्यार्थियों को बताया कि यदि किसी व्यक्ति या परिस्थिति से खतरा अथवा असहजता महसूस हो तो वहां रुककर स्थिति को समझने की कोशिश करने के बजाय सुरक्षित स्थान की ओर जाना चाहिए।

स्कूल, शिक्षक, अभिभावक, परिचित परिवार या ऐसी जगह जहां विश्वसनीय लोग मौजूद हों—ऐसे सुरक्षित स्थान तक पहुंचना तत्काल प्राथमिकता होनी चाहिए।

‘बताओ’—चुप्पी नहीं, सूचना ही सुरक्षा की पहली सीढ़ी

अभियान का तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण संदेश रहा—‘बताओ।’

बच्चों को बताया गया कि यदि उनके साथ कोई अनुचित, संदिग्ध या असहज घटना होती है तो उसे अपने तक सीमित रखना उचित नहीं है। माता-पिता, शिक्षक अथवा किसी विश्वसनीय व्यक्ति को तत्काल जानकारी देना बेहद जरूरी है।

कार्यक्रम में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि किसी गलत व्यवहार के लिए बच्चा स्वयं को दोषी न समझे और न ही डर के कारण घटना को छिपाए। समय पर दी गई जानकारी किसी बड़ी परेशानी को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

तीन स्कूल, तीन न्यायिक टीमें और करीब 200 विद्यार्थियों तक पहुंचा संदेश

शाहपुरा में आयोजित इस विधिक जागरूकता अभियान की खास बात यह रही कि इसे एक ही स्थान तक सीमित नहीं रखा गया। अलग-अलग विद्यालयों में न्यायिक अधिकारियों एवं अधिवक्ताओं की टीमों ने पहुंचकर विद्यार्थियों से सीधे संवाद किया।

एपेक्स एकेडमी स्कूल में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुश्री सीमा चौहान के साथ अधिवक्ता अंकित शर्मा ने विद्यार्थियों को बाल सुरक्षा, संरक्षण और विधिक अधिकारों की जानकारी दी।

वहीं द्रोणा पब्लिक स्कूल में न्यायिक मजिस्ट्रेट डॉ. मनमीत सिंह मोंगा एवं अधिवक्ता निखिल व्यास ने विद्यार्थियों को जागरूक करते हुए उन्हें संदिग्ध अथवा असहज परिस्थितियों में बिना भय सहायता प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया।

तीनों विद्यालयों में विद्यार्थियों को केवल कानूनी प्रावधानों की जानकारी देने तक कार्यक्रम सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्हें रोजमर्रा की परिस्थितियों में अपने विवेक का इस्तेमाल करने, खतरे को पहचानने और जरूरत पड़ने पर भरोसेमंद लोगों से सहायता लेने का संदेश दिया गया।

कानून किताबों से निकलकर बच्चों की समझ तक पहुंचा

विधिक जागरूकता का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होता है, जब कानून केवल न्यायालयों और पुस्तकों तक सीमित न रहकर आमजन के जीवन का हिस्सा बने। इसी दिशा में विद्यालयों में आयोजित ये शिविर महत्वपूर्ण साबित हुए।

विद्यार्थियों के बीच सीधे संवाद से उन्हें यह समझने का अवसर मिला कि कानून केवल अपराध होने के बाद कार्रवाई का माध्यम नहीं है, बल्कि जागरूकता के जरिए अपराध से बचाव और सुरक्षा सुनिश्चित करने का मजबूत माध्यम भी है।

शिविर के दौरान विद्यार्थियों ने विषय से जुड़े सवाल पूछे और अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। इससे कार्यक्रम संवादात्मक और प्रभावी बना।

डरना नहीं, सजग रहना है—यही रहा अभियान का सार

कार्यक्रम का मूल संदेश किसी भय का वातावरण बनाना नहीं, बल्कि बच्चों के भीतर सजगता, आत्मविश्वास और सहायता मांगने का साहस पैदा करना रहा।

विद्यार्थियों को प्रेरित किया गया कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि को हल्के में न लें। यदि कोई परिस्थिति उन्हें असहज करती है तो उसे पहचानें, वहां से सुरक्षित दूरी बनाएं और तत्काल किसी भरोसेमंद व्यक्ति को इसकी जानकारी दें।

इस प्रकार ‘मना करो, दूर जाओ, बताओ’ एक ऐसा सरल सुरक्षा सूत्र बनकर सामने आया, जिसे बच्चे आसानी से याद भी रख सकते हैं और जरूरत पड़ने पर व्यवहार में भी ला सकते हैं।

विद्यालय प्रशासन ने भी माना—जागरूक बच्चा ही सुरक्षित समाज की नींव

कार्यक्रम में संबंधित विद्यालयों के प्रधानाचार्य, शिक्षकगण एवं स्टाफ सदस्य मौजूद रहे। विद्यालयों ने विधिक जागरूकता के ऐसे कार्यक्रमों को बच्चों के सर्वांगीण विकास और सुरक्षा के लिए उपयोगी बताया।

करीब 200 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। विद्यार्थियों में कार्यक्रम को लेकर उत्साह दिखाई दिया और उन्होंने सुरक्षित, सजग एवं जिम्मेदार नागरिक बनने का संकल्पात्मक संदेश ग्रहण किया।

अभियान का बड़ा संदेश—बच्चों को कानून बताना ही नहीं, अधिकारों का एहसास कराना भी जरूरी

Transformative Tuesdays के माध्यम से शाहपुरा में हुआ यह आयोजन इस मायने में उल्लेखनीय रहा कि यहां विधिक जागरूकता को महज औपचारिक कार्यक्रम न बनाकर बच्चों की सुरक्षा और आत्मविश्वास से जोड़ा गया।

जब बच्चा अपने अधिकारों को समझता है, खतरे को पहचानता है और जरूरत पड़ने पर आवाज उठाना सीखता है, तभी कानून की जानकारी वास्तविक सुरक्षा कवच का रूप लेती है।

विद्यालयों में पहुंचकर न्यायिक अधिकारियों एवं अधिवक्ताओं द्वारा विद्यार्थियों से किया गया यह संवाद निश्चित रूप से विधिक साक्षरता के उद्देश्य को मजबूत करता है। ऐसे कार्यक्रम बच्चों को न केवल अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनाते हैं, बल्कि उन्हें जिम्मेदार, सजग और सुरक्षित नागरिक बनने की दिशा में भी प्रेरित करते हैं।

शाहपुरा में ‘मना करो… दूर जाओ… बताओ’ का संदेश यही कह गया—सुरक्षा की शुरुआत जागरूकता से होती है और जागरूकता की पहली पाठशाला संवाद है।

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