
संत उम्मेदरामजी की स्मृति में सेवा की पहल, 25 जरूरतमंद परिवारों को राशन किट बांटी
शाहपुरा। मूलचन्द पेसवानी
संत परंपरा में गुरु की स्मृति को केवल श्रद्धा तक सीमित न रखते हुए उसे सेवा और परमार्थ से जोड़ने की पहल की गई। संत उम्मेदरामजी महाराज के निर्वाण महोत्सव की स्मृति में सोमवार को शाहपुरा रामद्वारा में श्री सेवा कार्य उम्मेद समिति, रामद्वारा गंगापुर की ओर से संत श्री गुरुमुखरामजी रामस्नेही की प्रेरणा से विभिन्न सेवा कार्य किए गए।
इस दौरान शाहपुरा रामद्वारा में 25 जरूरतमंद परिवारों को राशन सामग्री की किट भेंट की गई। परिवारों ने सेवा सामग्री प्राप्त करने के साथ संतों का आशीर्वाद भी लिया। सेवा कार्य के दौरान संत श्री गुरुमुखरामजी रामस्नेही ने कहा कि गुरु की स्मृति तभी सार्थक है, जब उनके बताए सेवा और परमार्थ के मार्ग पर चलते हुए जरूरतमंदों तक सहायता पहुंचाई जाए।
अस्पताल में मरीजों को फल, गौशाला में गुड़-चारा
सेवा कार्य का सिलसिला यहीं नहीं रुका। जिला चिकित्सालय में भर्ती मरीजों को फल वितरित किए गए। वहीं श्री पशुपतिनाथ गौशाला में गायों को गुड़ एवं चारा खिलाया गया। सेवा कार्य के माध्यम से मानव सेवा के साथ जीव सेवा का भी संदेश दिया गया।
इसके अलावा रामनिवास धाम के मुख्य द्वार पर सोमवार सुबह बच्चों के लिए कलेवा के रूप में पोहा वितरित किया गया। इसमें संस्कृत स्कूल एवं गुरुकुल के बच्चों ने भी भागीदारी निभाई। सुबह के समय बच्चों को भोजन उपलब्ध कराने की इस पहल ने सेवा कार्य को सहज और आत्मीय स्वरूप दिया।

‘गुरु के आदेश को जीवन में उतारना ही सच्ची श्रद्धा’
संत श्री गुरुमुखरामजी रामस्नेही ने अपने गुरु संत उम्मेदरामजी महाराज का स्मरण करते हुए कहा कि गुरु के प्रति सदैव नतमस्तक रहना चाहिए। गुरु केवल मार्ग दिखाते नहीं, बल्कि जीवन को सार्थक दिशा देते हैं। गुरु के आदेश और उपदेशों को अपने आचरण में उतारकर मानव सेवा के कार्य करना ही गुरु के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।
उन्होंने कहा कि सेवा में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए। जरूरतमंद तक सहायता पहुंचाना, बीमार की सेवा करना, भूखे को भोजन देना और जीव मात्र के प्रति करुणा रखना भारतीय संत परंपरा की मूल भावना रही है।
संत उम्मेदरामजी महाराज के निर्वाण महोत्सव की स्मृति में हुए इन सेवा कार्यों ने इसी संत परंपरा को आगे बढ़ाने का संदेश दिया। राशन वितरण से जरूरतमंद परिवारों को सहारा मिला, अस्पताल में फल वितरण से मरीजों को राहत मिली और गौशाला में गुड़-चारा खिलाकर जीव सेवा का भाव प्रकट हुआ। सेवा कार्य में संतों की प्रेरणा और श्रद्धालुओं की सहभागिता रही।




