
त्रिमूर्ति स्मारक पर गूंजे ‘जय श्रीराम’ और ‘जय गौमाता’ के जयघोष, 101 निराश्रित गौवंशों को बांधे गए रक्षा सूत्र, गौसेवकों का भव्य सम्मान
शाहपुरा। धर्म, संस्कृति, राष्ट्रभक्ति और गौसेवा का अनुपम संगम उस समय देखने को मिला जब शाहपुरा के ऐतिहासिक त्रिमूर्ति स्मारक पर बालाजी गौवंश हेल्पलाइन परिवार की ओर से विश्व हिंदू परिषद, चित्तौड़ प्रांत के प्रांत गोरक्षा प्रमुख रामेश्वर लाल धाकड़ (शाहपुरा) तथा बालाजी गौवंश हेल्पलाइन के राजस्थान प्रांत प्रमुख राजेश सेन के सम्मान में भव्य स्वागत एवं अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया। ढोल-नगाड़ों की गूंज, भगवा ध्वजों की शान, ‘जय श्रीराम’ और ‘जय गौमाता’ के गगनभेदी उद्घोषों के बीच पूरा वातावरण राष्ट्रभक्ति, धर्मनिष्ठा और गौसेवा के भाव से सराबोर नजर आया।
कार्यक्रम की शुरुआत बस स्टैंड से विशाल स्वागत यात्रा के रूप में हुई। ढोल-नगाड़ों की थाप, उत्साह से लबरेज गौभक्तों की टोली और जयघोषों के साथ निकली यह शोभायात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से होती हुई भारत त्रिमूर्ति स्मारक पहुंची, जहां विश्व हिंदू परिषद के चित्तौड़ प्रांत गोरक्षा प्रमुख रामेश्वर लाल धाकड़ ने स्मारक पर माल्यार्पण कर राष्ट्रनायकों को श्रद्धासुमन अर्पित किए। इसके पश्चात उपस्थित गौसेवकों एवं अतिथियों ने उनका पुष्पमालाओं, साफा, शॉल एवं स्मृति चिह्न भेंट कर आत्मीय सम्मान किया।
अपने उद्बोधन में नव नियुक्त प्रांत गोरक्षा प्रमुख रामेश्वर लाल धाकड़ ने कहा कि गौमाता केवल एक पशु नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की आत्मा हैं। उन्होंने कहा कि आज पूरे देश में गौमाता को ‘राष्ट्रमाता’ का दर्जा दिलाने का जनआंदोलन चल रहा है और इस अभियान को गांव-गांव, घर-घर तक पहुंचाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जब तक प्रत्येक नागरिक गौसंरक्षण को अपना व्यक्तिगत दायित्व नहीं मानेगा, तब तक गौवंश की सुरक्षा का उद्देश्य पूर्ण नहीं हो सकेगा।
धाकड़ ने कहा कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है और गांवों की समृद्धि का आधार सदियों से गौपालन रहा है। यदि ग्रामीण परिवेश में गौपालन और गौआधारित रोजगार को प्रोत्साहित किया जाए तो न केवल गौवंश का संरक्षण होगा, बल्कि बेरोजगारी जैसी गंभीर समस्या का भी प्रभावी समाधान निकल सकता है। उन्होंने कहा कि गोबर, गौमूत्र, जैविक खेती, पंचगव्य उत्पाद, प्राकृतिक कृषि और गौआधारित लघु उद्योगों को बढ़ावा देकर हजारों युवाओं को स्वरोजगार उपलब्ध कराया जा सकता है। उन्होंने सरकार से राष्ट्रीय स्तर पर सशक्त गौसंरक्षण नीति बनाने की आवश्यकता पर बल देते हुए समाज के प्रत्येक वर्ग से इस पुनीत अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।

उन्होंने भावुक स्वर में कहा कि “गौमाता केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि राष्ट्र की संस्कृति, कृषि, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण की आधारशिला हैं। यदि गौवंश सुरक्षित रहेगा तो गांव समृद्ध होंगे, किसान आत्मनिर्भर बनेगा और राष्ट्र सशक्त होगा।” उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय से संकल्प लेने का आह्वान किया कि प्रत्येक परिवार कम से कम एक गौसेवा का कार्य नियमित रूप से अवश्य करे तथा निराश्रित गौवंश की सेवा और संरक्षण को सामाजिक आंदोलन का स्वरूप प्रदान करे।
समारोह का सबसे प्रेरणादायक और आकर्षण का केंद्र रहा 101 निराश्रित गौवंशों को रक्षा सूत्र स्वरूप रेडियम बेल्ट बांधने का विशेष सेवा अभियान। बालाजी गौवंश हेल्पलाइन अध्यक्ष खुशराज वैष्णव, मैनेजमेंट प्रभारी ओमप्रकाश साहू एवं जिलाध्यक्ष विष्णु शर्मा के सान्निध्य में संपन्न इस अभियान का उद्देश्य निराश्रित गौवंशों की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा रात्रि के समय सड़क दुर्घटनाओं से उनकी रक्षा करना रहा। रेडियम बेल्ट के माध्यम से अंधेरे में भी गौवंश दूर से दिखाई देंगे, जिससे दुर्घटनाओं की संभावना कम होगी। इस अभिनव सेवा कार्य की उपस्थित जनसमुदाय ने मुक्त कंठ से सराहना की और इसे गौसंरक्षण की दिशा में अत्यंत उपयोगी पहल बताया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि गौसेवा केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना और सामाजिक उत्तरदायित्व का भी प्रतीक है। आज आवश्यकता इस बात की है कि समाज का प्रत्येक व्यक्ति निराश्रित गौवंश के लिए चारा, पानी, चिकित्सा और सुरक्षित आश्रय की व्यवस्था में अपनी सहभागिता निभाए। गौमाता की रक्षा केवल किसी एक संगठन या संस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक राष्ट्रभक्त नागरिक का नैतिक कर्तव्य है।
समारोह में बड़ी संख्या में गौभक्तों, धर्मप्रेमियों, युवाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं क्षेत्रवासियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर आयोजन की गरिमा को चार चांद लगाए। उपस्थित लोगों ने एक स्वर में गौसंरक्षण को जनआंदोलन बनाने तथा गौमाता को राष्ट्रमाता का सम्मान दिलाने के लिए जनजागरण अभियान चलाने का संकल्प लिया। पूरा परिसर राष्ट्रभक्ति, सामाजिक समरसता और गौसेवा के संदेश से अनुप्राणित दिखाई दिया।
इस अवसर पर दिनेश प्रजापत, कमल बगड़ावत, सुरेश भाट, नीरज भाट, रवि खारोल, भगवत सिंह लूलांस, प्रतीक देव गुर्जर, मुकेश प्रजापत, परमानंद धोबी, भगवान लढ़ा, देवराज जाट सहित अनेक गौभक्तों एवं कार्यकर्ताओं ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। सैकड़ों गौसेवकों की मौजूदगी में दोनों सम्माननीय गौसेवकों का अभिनंदन किया गया और उनके गौसंरक्षण के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की गई।
समापन अवसर पर उपस्थित सभी गौभक्तों ने हाथ उठाकर संकल्प लिया कि वे गौवंश की रक्षा, सेवा और संवर्धन के लिए सदैव तत्पर रहेंगे तथा समाज में गौसेवा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास करेंगे। कार्यक्रम के अंत तक ‘जय श्रीराम’, ‘जय गौमाता’, ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम्’ के गगनभेदी उद्घोष पूरे वातावरण को राष्ट्रभक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत करते रहे।
शाहपुरा में आयोजित यह भव्य समारोह केवल सम्मान का कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि गौमाता को राष्ट्रमाता का सम्मान दिलाने, गौवंश संरक्षण को जनआंदोलन बनाने और प्रत्येक नागरिक को गौसेवा से जोड़ने का प्रभावी संदेश देकर एक नई सामाजिक चेतना का सूत्रपात करने वाला प्रेरणादायक आयोजन सिद्ध हुआ।




