कथावाचक गजेन्द्र गोपाल शास्त्री बोले, अहंकार विनाश का मार्ग, शिवत्व ही जीवन का सार
श्रावण में शिवमय हुआ शाहपुरा, महापुराण कथा में उमड़ा आस्था का सैलाब दक्ष यज्ञ और माता सती के प्रसंगों ने झकझोरा मन,

मूलचन्द पेसवानी
शाहपुरा। श्रावण मास की पावन बेला में पूरा शाहपुरा इन दिनों भगवान भोलेनाथ की भक्ति में सराबोर है। माहेश्वरी पंचायत भवन, सदर बाजार में चल रही नौ दिवसीय श्री शिव महापुराण कथा का द्वितीय दिवस श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम बन गया। कथा पांडाल में दोपहर से ही श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। महिलाओं, युवाओं, बुजुर्गों और बच्चों की बड़ी संख्या ने भगवान शिव की दिव्य कथाओं का रसपान किया। पूरा परिसर “हर-हर महादेव”, “बम-बम भोले” और “ॐ नमः शिवाय” के जयघोषों से गूंज उठा, जिससे वातावरण पूर्णतः शिवमय हो गया।
जगद्गुरु निम्बार्काचार्य श्रीश्रीजी महाराज के परम शिष्य एवं सुप्रसिद्ध कथावाचक गजेन्द्र गोपाल शास्त्री ने अत्यंत ओजस्वी, सरल एवं भावपूर्ण शैली में श्री शिव महापुराण का वाचन करते हुए दक्ष प्रजापति के यज्ञ, माता सती के त्याग, भगवान शिव के वैराग्य तथा सनातन धर्म की मर्यादाओं का ऐसा सजीव चित्रण किया कि श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। कथा के दौरान कई अवसर ऐसे आए, जब श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं और पूरा पांडाल भक्ति भाव में डूब गया।
कथावाचक ने शिव महापुराण के प्रसिद्ध दक्ष यज्ञ प्रसंग का विस्तार से वर्णन करते हुए बताया कि जब अहंकार व्यक्ति के विवेक पर हावी हो जाता है, तब वह अपने ही संबंधों और संस्कारों को भूल बैठता है। दक्ष प्रजापति ने अपने अभिमान के कारण भगवान शिव का अपमान किया और उन्हें यज्ञ में आमंत्रित नहीं किया। माता सती ने पति के सम्मान की रक्षा के लिए पिता के यज्ञ में पहुंचकर धर्म और मर्यादा का पक्ष रखा, लेकिन जब वहां भगवान शिव का अपमान देखा तो उन्होंने योगाग्नि में अपने प्राणों का त्याग कर दिया। यह प्रसंग केवल पौराणिक कथा नहीं, बल्कि आज के समाज के लिए भी गहरा संदेश देता है कि जहां सम्मान समाप्त हो जाता है, वहां रिश्ते भी टूटने लगते हैं।

उन्होंने कहा कि आज के आधुनिक जीवन में भी परिवारों में बढ़ते विवाद, अहंकार, स्वार्थ और संवादहीनता का मूल कारण वही है, जो दक्ष के भीतर था। यदि परिवारों में भगवान शिव जैसा धैर्य, माता सती जैसी निष्ठा और परस्पर सम्मान का भाव विकसित हो जाए, तो अनेक सामाजिक समस्याएं स्वतः समाप्त हो सकती हैं।
शास्त्री ने भगवान शिव के अद्भुत व्यक्तित्व का वर्णन करते हुए कहा कि शिव त्याग, तपस्या, करुणा और समानता के प्रतीक हैं। वे राजमहलों में नहीं, बल्कि कैलाश की वादियों में निवास करते हैं। शरीर पर भस्म, गले में सर्प, जटाओं में गंगा और मस्तक पर चंद्र धारण करने वाले भगवान शिव हमें यह संदेश देते हैं कि सादगी ही सबसे बड़ा वैभव है और त्याग ही सबसे बड़ा आभूषण। उन्होंने कहा कि आज की भागदौड़, तनाव और प्रतिस्पर्धा से भरी जिंदगी में यदि व्यक्ति शिव के वैराग्य, धैर्य और संतुलन को अपने जीवन में उतार ले तो मानसिक अशांति, क्रोध और तनाव से मुक्ति पा सकता है।
कथा के दौरान उन्होंने युवाओं को विशेष संदेश देते हुए कहा कि आज की पीढ़ी सोशल मीडिया और भौतिक सुख-सुविधाओं की दौड़ में आध्यात्मिक मूल्यों से दूर होती जा रही है। शिव महापुराण केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन प्रबंधन का अद्भुत मार्गदर्शक है। भगवान शिव का जीवन सिखाता है कि शक्ति और विनम्रता, वैराग्य और जिम्मेदारी, तपस्या और करुणा—इन सभी का संतुलन ही सफल जीवन की पहचान है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि श्रावण मास केवल जलाभिषेक और पूजा-अर्चना का पर्व नहीं, बल्कि अपने भीतर बैठे अहंकार, क्रोध, ईर्ष्या और द्वेष का अभिषेक कर उन्हें समाप्त करने का भी अवसर है। जब मन निर्मल होगा, तभी शिव की कृपा सहज रूप से प्राप्त होगी।
कथा के बीच-बीच में प्रस्तुत हुए शिव भजनों ने श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया। “शिव तांडव”, “भोलेनाथ के जयकारे” और “हर-हर महादेव” के गगनभेदी उद्घोषों के साथ पूरा पांडाल भक्तिमय ऊर्जा से भर उठा। श्रद्धालु हाथों में रुद्राक्ष की मालाएं लिए भगवान शिव का स्मरण करते रहे और अनेक भक्त भजनों की धुन पर झूमते नजर आए। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो कैलाश की आध्यात्मिक अनुभूति स्वयं शाहपुरा की धरती पर उतर आई हो।
श्रद्धालुओं ने पूरे मनोयोग और श्रद्धा के साथ कथा का श्रवण कर भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त किया। कथा समाप्ति के पश्चात भगवान शिव की महाआरती हुई, जिसमें उपस्थित श्रद्धालुओं ने दीप प्रज्वलित कर परिवार, समाज और राष्ट्र की सुख-समृद्धि की कामना की।
श्रीनाथजी भक्त मंडल ने बताया कि नौ दिवसीय श्री शिव महापुराण कथा का आयोजन 09 अगस्त 2026 तक प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से सायं 5 बजे तक माहेश्वरी पंचायत भवन, सदर बाजार में किया जा रहा है। कथा में प्रतिदिन शिव महापुराण के विभिन्न दिव्य प्रसंगों का रसपूर्ण वर्णन किया जाएगा। मंडल ने सभी धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे सपरिवार कथा में पधारकर भगवान भोलेनाथ की अमृतमयी कथा का श्रवण करें और अपने जीवन को धर्म, संस्कार एवं आध्यात्मिक चेतना से आलोकित बनाएं।




