
भीलवाड़ा, 8 सितम्बर। संसार से मुक्ति पाने का एकमात्र माध्यम राम का नाम है और राम की साधना ही मुक्ति के द्वार खोलती है। संसार न कभी हमारा था, न है और न रहेगा, जबकि राम कल भी हमारे थे, आज भी हैं और कल भी रहेंगे। दुनिया बदलती रहेगी, नजर बदलती रहेगी, लेकिन यदि कुछ अपरिवर्तनीय रहेगा तो वह राम का नाम और उसकी महिमा है। यह विचार अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय शाहपुरा के पीठाधीश्वर जगतगुरु आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज ने ‘विश्व शांति कल्याण’ चातुर्मास के तहत मंगलवार को आयोजित दैनिक सत्संग में व्यक्त किए।
आचार्यश्री ने कहा कि जिसके जीवन में राम प्रिय हैं, उसका जीवन आदर्श बन सकता है। व्यक्ति जितना तन से दुखी नहीं है, उससे कहीं अधिक मन से दुखी है। आज मानसिक विकृतियां परिवार, समाज और राष्ट्र तक को तबाह कर रही हैं। मानसिक विकृतियों का उपचार राम नाम में है और यह उपचार संत एवं सद्गुरु ही कर सकते हैं।
भजन के बिना जीवन विनाश की ओर
आचार्य रामदयालजी महाराज ने कहा कि भजन के बिना जीवन सार्थक नहीं हो सकता। जिसके जीवन में भजन नहीं है, वह विनाश की ओर बढ़ रहा है और जिसके जीवन में भजन का आधार है, उसका चहुंमुखी विकास होता है। महापुरुषों ने भी भजन के माध्यम से मानसिक साधना की है। साधना के लिए मन की एकाग्रता जरूरी है।
उन्होंने कहा कि जिसके मस्तक पर राम विराजमान हैं, उसे किसी अन्य सहारे की आवश्यकता नहीं रहती। जीवन के सभी सारों का सार राम का नाम है। राम जड़ और चेतन सहित जगत के कण-कण में व्याप्त हैं। हमारे जिन कर्मों से संसार घृणा करता है, उन्हें समाप्त करने का सामर्थ्य भी राम नाम में है। राम नाम को पढ़ लिया तो मानो जगत का सार पढ़ लिया।
नारंगी नहीं, खरबूजे जैसी हो राष्ट्रीय एकता
आचार्यश्री ने अपने संबोधन में सामाजिक और राष्ट्रीय एकता का संदेश देते हुए कहा कि हमारी राष्ट्रीय एवं सामाजिक एकता नारंगी की तरह नहीं, बल्कि खरबूजे की तरह होनी चाहिए। नारंगी बाहर से एक दिखाई देती है, लेकिन भीतर अनेक फांकों में बंटी होती है। इसके विपरीत खरबूजे पर बाहर से अलग-अलग धारियां दिखाई देती हैं, लेकिन भीतर वह एक होता है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में हर राजनीतिक दल और हर समाज में बिखराव की स्थिति दिखाई दे रही है। एकता के अभाव में देश और समाज को नुकसान हो रहा है। यदि सभी राजनीतिक दल एक होकर देशभक्ति का परिचय दें तो भारत से आतंकवाद समाप्त होकर रहेगा। अंदर की फूट देश को कमजोर करती है।
राग-द्वेष से ऊपर उठना ही सच्ची भक्ति
आचार्य रामदयालजी महाराज ने कहा कि जिसकी व्यथा और दुख चला जाए, जो राग-द्वेष तथा हर्ष-विषाद से ऊपर उठ जाए, वही परमात्मा का प्रिय होता है। ऐसा भक्त किसी प्रकार की आकांक्षा नहीं रखता। जो प्रिय को पाकर प्रसन्न और अप्रिय को पाकर दुखी नहीं होता, वही भगवान का सच्चा भक्त है।
उन्होंने कहा कि सच्चा भक्त न किसी की निंदा करता है और न किसी की स्तुति। वह न किसी को अच्छा कहता है और न किसी को बुरा। उसका मन समभाव में रहता है।
आचार्यश्री ने कहा कि जब तक हमारी पूर्ति नहीं हो जाती, तब तक संसार, गुरु और परमात्मा से हमारा संबंध स्वार्थ और अपेक्षाओं से जुड़ा रहता है। परमार्थ भाव से परमात्मा को चाहने वाले लोग अंगुलियों पर गिने जा सकते हैं। हम माता-पिता से संपत्ति की अपेक्षा रखते हैं, लेकिन उनकी सेवा करने से बचते हैं। उन्होंने महाभारत का प्रसंग बताते हुए कहा कि श्रीकृष्ण ने अर्जुन को समझाया था कि भगवान को वही प्रिय होता है, जिसकी कोई अपेक्षा नहीं होती।
संत मनोरथरामजी ने किया मानस प्रवचन
आचार्यश्री के प्रवचन से पूर्व अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय के प्रखर वक्ता संत मनोरथरामजी आलोट ने मानस प्रवचन किया। प्रवचन के विश्राम के बाद श्रद्धालुओं ने आचार्यश्री रामदयालजी महाराज की आरती की।
सत्संग में भीलवाड़ा सहित विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। सूर्यास्त के समय होने वाली संध्या आरती तथा रामस्नेही सम्प्रदाय के युवा संत रामजस ईडर द्वारा प्रस्तुत भक्तमाल कथा में भी प्रतिदिन श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या जुट रही है।
13 से 20 सितम्बर तक विराट श्रीमद्भागवत ज्ञान सप्ताह
आचार्य रामदयालजी महाराज ने बताया कि रामद्वारा में ‘विश्व शांति कल्याण’ चातुर्मास के तहत 13 से 20 सितम्बर तक विराट श्रीमद्भागवत ज्ञान सप्ताह का आयोजन किया जाएगा। विश्व शांति एवं कल्याण की भावना से होने वाले इस आयोजन की व्यापक तैयारियां की जा रही हैं।
ज्ञान सप्ताह में भागवत भक्ति, भक्त और भगवान के संबंध तथा जीवन दर्शन पर प्रवचन होंगे। आयोजन के दौरान 108 श्रीमद्भागवत के मूल पाठ का ऐतिहासिक आयोजन भी होगा। पुष्कर से आने वाले 108 वेदपाठी विद्वान पंडित भागवत का मूल पाठ करेंगे, जबकि इन 108 भागवत का पूजन 108 यजमान परिवारों द्वारा किया जाएगा।
आयोजन के तहत प्रतिदिन सुबह 8.30 से 10.30 बजे तथा दोपहर 2 से 4 बजे तक श्रीमद्भागवत कथा होगी। वहीं सुबह 10.30 से 11.30 बजे तथा शाम 4 से 5 बजे तक श्रीवाणीजी का प्रवचन होगा। श्रीवाणीजी का प्रवचन आचार्य श्रीरामदयालजी महाराज के मुखारविंद से होगा, जबकि श्रीमद्भागवत कथा का वाचन संत मनोरथरामजी राम मचलाना करेंगे।




