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‘गुरु ही राष्ट्र निर्माण की आधारशिला’ : शाहपुरा में गुरु वंदन कार्यक्रम में शिक्षकों का हुआ अभिनंदन, भारतीय शिक्षा परंपरा के पुनर्जागरण का लिया संकल्प

अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के आयोजन में शिक्षा, संस्कार और राष्ट्र निर्माण पर हुआ गंभीर मंथन, सैकड़ों शिक्षक रहे उपस्थित

शाहपुरा, 30 जुलाई। भारतीय संस्कृति में गुरु को ईश्वर से भी श्रेष्ठ स्थान प्रदान किया गया है। “गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु, गुरु देवो महेश्वरः” की इसी सनातन परंपरा को सशक्त करने और शिक्षकों के सम्मान के उद्देश्य से अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (विद्यालय शिक्षा), जिला शाहपुरा के तत्वावधान में आदर्श विद्या मंदिर, गांधीपुरी, शाहपुरा में ‘गुरु वंदन कार्यक्रम’ का भव्य एवं गरिमामय आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शिक्षा, संस्कृति, भारतीय ज्ञान परंपरा, गुरु-शिष्य संबंध और राष्ट्र निर्माण में शिक्षक की भूमिका पर सारगर्भित विचार रखे गए।

कार्यक्रम में प्रदेश, संभाग और जिला स्तर के शिक्षा जगत से जुड़े पदाधिकारियों, शिक्षा अधिकारियों एवं बड़ी संख्या में शिक्षकों की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की। पूरे वातावरण में गुरु के प्रति श्रद्धा, शिक्षा के प्रति समर्पण और राष्ट्र निर्माण के संकल्प की भावना स्पष्ट दिखाई दी।

जिला मंत्री अमर सिंह चौहान ने कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि समारोह के मुख्य अतिथि प्रदेश महामंत्री महेंद्र कुमार लखारा ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में कहा कि “गुरु केवल पाठ पढ़ाने वाला शिक्षक नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का सबसे महत्वपूर्ण आधार होता है। भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोच्च है और प्रत्येक शिक्षक का दायित्व है कि वह अपने श्रेष्ठ आचरण, नैतिक मूल्यों और जीवन शैली से विद्यार्थियों के भीतर संस्कारों का संचार करे।”

उन्होंने कहा कि आज की शिक्षा व्यवस्था में केवल ज्ञान का प्रसार पर्याप्त नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को चरित्रवान, अनुशासित, संवेदनशील और राष्ट्रनिष्ठ नागरिक बनाना भी शिक्षकों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। यदि शिक्षक अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करें तो राष्ट्र का भविष्य स्वतः उज्ज्वल होगा।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता सूर्य प्रकाश शर्मा ने अपने ओजस्वी विचार रखते हुए कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि ऐसे नागरिक तैयार करना है जो चरित्रवान, कर्तव्यनिष्ठ और राष्ट्रभक्त हों। उन्होंने कहा कि भारतीय शिक्षा प्रणाली की सबसे बड़ी विशेषता गुरु-शिष्य संबंधों की आत्मीयता रही है, जिसे वर्तमान समय में पुनः सशक्त बनाने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा को भारतीय ज्ञान परंपरा, नैतिक मूल्यों और सांस्कृतिक चेतना से जोड़ना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। यदि शिक्षा में संस्कारों का समावेश नहीं होगा तो समाज का संतुलित विकास संभव नहीं है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रदेश उपाध्यक्ष भंवर सिंह राठौड़ ने कहा कि शिक्षक केवल विद्यालय का कर्मचारी नहीं, बल्कि समाज का पथ-प्रदर्शक और भविष्य का निर्माता होता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा के साथ संस्कार, नैतिकता, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्रीय चेतना का समावेश अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने शिक्षकों का आह्वान किया कि वे विद्यार्थियों को केवल परीक्षा के लिए नहीं, बल्कि जीवन के लिए तैयार करें।

विशिष्ट अतिथि एवं संभाग संगठन मंत्री महेश कुमार शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षक संगठन केवल शिक्षकों के अधिकारों और हितों की रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का भी पूरी निष्ठा से निर्वहन करता है। उन्होंने कहा कि ‘गुरु वंदन’ जैसे आयोजन नई पीढ़ी में गुरुजनों के प्रति सम्मान, श्रद्धा और कृतज्ञता की भावना विकसित करने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

जिलाध्यक्ष संजीव कुमार शर्मा ने कहा कि शिक्षकों का सम्मान केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि समाज के उज्ज्वल भविष्य का सम्मान है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रेरणादायी कार्यक्रम शिक्षा व्यवस्था को नई ऊर्जा प्रदान करते हैं, शिक्षकों का मनोबल बढ़ाते हैं तथा उन्हें और अधिक समर्पण के साथ कार्य करने की प्रेरणा देते हैं।

कार्यक्रम में मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी डॉ. सत्यनारायण कुमावत, अतिरिक्त मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी राजेंद्र शर्मा, विभाग संगठन मंत्री महेश कुमार शर्मा (केकड़ी), शाहपुरा आरपी प्रशांत चौधरी, बनेड़ा आरपी शंकरलाल जाट, राजेश माली, चंद्रशेखर शर्मा, प्राचार्य धारा सिंह मीणा, प्राचार्य अनिल बघेरवाल तथा प्राचार्य लोकेश धाभाई सहित अनेक शिक्षा अधिकारी एवं प्रबुद्धजन विशेष रूप से उपस्थित रहे।

अतिथियों का स्वागत एवं सम्मान भारतीय संस्कृति के अनुरूप पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ किया गया। इस अवसर पर उपस्थित शिक्षकों ने शिक्षा में गुणवत्ता संवर्धन, भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा के संरक्षण तथा विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों और राष्ट्रभक्ति की भावना विकसित करने का सामूहिक संकल्प लिया।

कार्यक्रम में जिला अध्यक्ष संजीव कुमार शर्मा, जिला मंत्री अमर सिंह चौहान, पूर्व संभाग महिला मंत्री इंदिरा धूपिया, जिला कोषाध्यक्ष शांतिलाल पोखरण, जिला उपाध्यक्ष सीताराम जाट, हनुमान प्रसाद शर्मा, शिवचरण शर्मा, जिला सचिव मुकेश कुमावत, दिनेश शर्मा, दिनेश लक्षकार, जिला महिला संगठन मंत्री प्रिया सोनी, कोटड़ी खंड अध्यक्ष दुर्गाशंकर शर्मा, फूलियाकलां अध्यक्ष रामगोपाल मीणा, जहाजपुर खंड अध्यक्ष मानसिंह मीणा, खंड मंत्री राकेश सोनी, खंड कोषाध्यक्ष नयन बुला, सभाध्यक्ष मोहनलाल कोली, शिवराज धाकड़, राहुल दाधीच, मनोज सोनी, हरिनिवास खारोल, नवरत्नमल बगड़िया, संजय त्रिपाठी, पंकज सोनगरा, शिवराज कुम्हार, कुलदीप कलाल, हरिओम शर्मा सहित जिले भर से आए सैकड़ों शिक्षक एवं शिक्षिकाएं उपस्थित रहे।

समापन अवसर पर शिक्षकों ने एक स्वर में संकल्प व्यक्त किया कि वे भारतीय शिक्षा दर्शन, सांस्कृतिक मूल्यों और गुरु-शिष्य परंपरा को सुदृढ़ बनाते हुए विद्यार्थियों को ज्ञान के साथ-साथ संस्कार, नैतिकता और राष्ट्रसेवा की भावना से भी परिपूर्ण करेंगे। पूरे आयोजन ने यह संदेश दिया कि जब शिक्षक सशक्त होंगे, तभी समाज सशक्त होगा और राष्ट्र का भविष्य सुरक्षित एवं उज्ज्वल बनेगा।

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