
पहले ही दिन गुरु पूजन और धर्म चर्चा में जुटे हजारों श्रद्धालु
3 अगस्त से नियमित प्रवचन; देशभर से पहुंचेगा श्रद्धालुओं का जनसैलाब
भीलवाड़ा।मूलचन्द पेसवानी
धर्मनगरी भीलवाड़ा में पहली बार चातुर्मास के लिए पधारे प्रख्यात राष्ट्र संत, ओजस्वी प्रवचनकार मनोज्ञाचार्य पूज्य गुरुदेव पुलकसागरजी महाराज के ऐतिहासिक और भव्य मंगल प्रवेश के बाद रविवार को सूर्यमहल परिसर पूरी तरह श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर नजर आया। सुबह से ही शहर के विभिन्न क्षेत्रों सहित आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं गुरुदेव के दर्शन, गुरु पूजन और धर्म चर्चा का लाभ लेने के लिए उमड़ पड़े।
हालांकि चातुर्मास का विधिवत शुभारंभ 2 अगस्त को चातुर्मासिक मंगल कलश स्थापना के साथ होगा, लेकिन उससे पहले ही श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा है। श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट, मेन सेक्टर शास्त्रीनगर के तत्वावधान में सकल दिगम्बर जैन समाज द्वारा आयोजित इस चातुर्मास को लेकर पूरे शहर में धार्मिक उल्लास का वातावरण है।

गुरु पूजन के साथ हुई आध्यात्मिक शुरुआत
रविवार सुबह सूर्यमहल परिसर में निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सबसे पहले गुरु पूजन हुआ, जिसके बाद गुरुदेव पुलकसागरजी महाराज ने धर्म चर्चा के माध्यम से श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन किया। इस दौरान अनेक श्रावकों ने अपने जीवन, धर्म और अध्यात्म से जुड़े प्रश्न गुरुदेव के समक्ष रखे, जिनका उन्होंने सरल, सहज और प्रेरणादायी शैली में समाधान किया।
श्री पुलकसागर चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी ने बताया कि पहले ही दिन शहर के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। गुरुदेव के दर्शन और उनके सानिध्य में धर्म चर्चा का लाभ लेने के लिए सुबह से ही सूर्यमहल परिसर श्रद्धालुओं से भर गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ नव्या जैन द्वारा मंगलाचरण से हुआ। इसके बाद शास्त्रीनगर महिला मंडल की सदस्यों ने गुरु भक्ति से ओतप्रोत मनमोहक नृत्य प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

सकल दिगम्बर जैन समाज ने किया स्वागत
कार्यक्रम में सकल दिगम्बर जैन समाज भीलवाड़ा के विभिन्न मंदिरों के अध्यक्षों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर आयोजन का शुभारंभ किया। गुरु चरणों के पाद प्रक्षालन का सौभाग्य पुलक चेतना मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद फंडोत ने प्राप्त किया। इसके बाद श्रद्धालुओं ने गुरुदेव से आशीर्वाद लिया और धर्म चर्चा के माध्यम से आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्राप्त किया।
गुरुदेव पुलकसागरजी महाराज ने धर्म चर्चा के दौरान संयम, संस्कार, आत्मचिंतन और धर्ममय जीवन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक उन्नति का संदेश दिया।

1 अगस्त को होगा गुरु गुणानुवाद महोत्सव
चातुर्मास समिति के संयोजक मनीष शाह ने बताया कि गुरुदेव के सानिध्य में 1 अगस्त को चित्रकूटधाम में भव्य गुरु गुणानुवाद कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। दोपहर 2 बजे से प्रारंभ होने वाले इस कार्यक्रम में गुरु महिमा पर आधारित भजनों की विशेष प्रस्तुति होगी।
प्रसिद्ध गायक राहुल भट्ट और मुंबई की चर्चित रेडियो जॉकी विधि जैन गुरु भक्ति से ओतप्रोत भजनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक रस से सराबोर करेंगे। कार्यक्रम की शुरुआत मंगलाचरण से होगी। इसके बाद गुरु पूजन, पाद प्रक्षालन और शास्त्र भेंट की रस्में संपन्न होंगी तथा मंगल आरती के साथ कार्यक्रम का समापन होगा।
2 अगस्त को होगा चातुर्मास का विधिवत शुभारंभ
समिति के अनुसार 2 अगस्त को चातुर्मासिक मंगल कलश स्थापना समारोह के साथ चातुर्मास का औपचारिक शुभारंभ होगा। इस अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति रहने की संभावना है। आयोजन को लेकर सभी तैयारियां अंतिम चरण में हैं।
3 अगस्त से नियमित होंगे प्रवचन
समिति के सह संयोजक लोकेश अजमेरा ने बताया कि 3 अगस्त से प्रतिदिन सुबह 8:30 बजे से 10 बजे तक शास्त्रीनगर स्थित सूर्यमहल परिसर में गुरुदेव पुलकसागरजी महाराज के नियमित चातुर्मासिक प्रवचन होंगे। इन प्रवचनों में धर्म, अध्यात्म, संस्कार, परिवार, समाज और राष्ट्र निर्माण जैसे विविध विषयों पर गुरुदेव अपने ओजस्वी विचार रखेंगे।
उन्होंने बताया कि गुरुदेव के प्रथम चातुर्मास को लेकर देशभर के श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह है। राजस्थान सहित मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली और अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के भीलवाड़ा पहुंचने की संभावना है।
15 से 30 अगस्त तक होगा ज्ञान गंगा महोत्सव
चातुर्मास के दौरान 15 अगस्त से 30 अगस्त तक चित्रकूटधाम में भव्य ज्ञान गंगा महोत्सव का आयोजन भी किया जाएगा। इस महोत्सव में धार्मिक प्रवचन, आध्यात्मिक संगोष्ठियां, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और विभिन्न धार्मिक आयोजन होंगे। आयोजन समिति ने इसे भीलवाड़ा के धार्मिक इतिहास का एक यादगार आयोजन बनाने की तैयारी की है।
धर्मनगरी भीलवाड़ा में पहली बार पूज्य गुरुदेव पुलकसागरजी महाराज के सानिध्य में आयोजित हो रहा यह चातुर्मास न केवल जैन समाज, बल्कि समूचे शहर के लिए आस्था, संस्कार और आध्यात्मिक चेतना का एक महत्वपूर्ण पर्व बन गया है। श्रद्धालुओं का उत्साह और उमड़ती भीड़ इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में यह चातुर्मास प्रदेश के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में शुमार होगा।




