शाहपुरा के ढीकोला का लाल इंदौर में लिख रहा देशभक्ति की अनोखी कहानी
धरती से आसमान तक तिरंगे की उड़ान

शाहपुरा। स्वतंत्रता दिवस पर देश का हर कोना तिरंगे के रंग में रंग जाता है। कहीं सरकारी कार्यालयों पर राष्ट्रध्वज शान से लहराता है तो कहीं स्कूल-कॉलेजों में बच्चे हाथों में तिरंगा लेकर देशभक्ति के गीत गाते हैं। बाजारों से लेकर गलियों तक ‘भारत माता की जय’ के जयघोष सुनाई देते हैं। लेकिन इंदौर में एक शख्स की देशभक्ति का अंदाज कुछ अलग है। यहां तिरंगा केवल किसी इमारत की छत पर नहीं, बल्कि आसमान की ऊंचाइयों में लहराता नजर आता है। इस अनोखी देशभक्ति के पीछे हैं शाहपुरा तहसील के ढीकोला गांव के रहने वाले शिव माली, जो हर वर्ष 15 अगस्त और 26 जनवरी को पतंग के जरिए आसमान में तिरंगा फहराते हैं।
शिव माली की यह पहल अब केवल एक दिन का जुनून नहीं रह गई है, बल्कि करीब छह वर्षों से देशभक्ति की एक अनूठी परंपरा बन चुकी है। स्वतंत्रता दिवस हो या गणतंत्र दिवस, दोनों राष्ट्रीय पर्वों पर शिव अपने घर की छत से तिरंगे को पतंग के साथ आसमान की ओर रवाना करते हैं। देखते ही देखते राष्ट्रध्वज जमीन से सैकड़ों फीट ऊपर इंदौर के आसमान में अपनी अलग पहचान बना लेता है।

जब आसमान बना तिरंगे का मंच
इस बार भी स्वतंत्रता दिवस पर शिव माली ने अपने घर की छत से पतंग के माध्यम से तिरंगा आसमान में फहराया। तिरंगा जैसे-जैसे ऊंचाई पकड़ता गया, वैसे-वैसे देखने वालों की नजरें भी आसमान पर टिकती चली गईं। हवा के साथ लहराता राष्ट्रध्वज दूर से ही आकर्षण का केंद्र बन गया।
बताया जाता है कि शिव करीब 1000 फीट तक की ऊंचाई पर पतंग के जरिए तिरंगा फहराते हैं। आसमान में ऊंचाई पर लहराता तिरंगा देखकर लोगों में देशभक्ति का जोश दिखाई देता है। इस दौरान ‘भारत माता की जय’, ‘विजय विश्व तिरंगा प्यारा, झंडा ऊंचा रहे हमारा’ जैसे जयघोष वातावरण को राष्ट्रभक्ति से भर देते हैं।
यह दृश्य अपने आप में अनूठा होता है। नीचे शहर की चहल-पहल और ऊपर नीले आसमान में लहराता तिरंगा—मानो धरती और आकाश के बीच देशभक्ति का सेतु बन गया हो।

छह साल से कायम है देशभक्ति की यह उड़ान
शिव माली पिछले करीब छह वर्षों से राष्ट्रीय पर्वों पर यह अनूठा कार्य करते आ रहे हैं। 15 अगस्त और 26 जनवरी आते ही उनकी तैयारियां शुरू हो जाती हैं। उनका उद्देश्य किसी प्रदर्शन से अधिक राष्ट्रध्वज के प्रति सम्मान और लोगों में देशभक्ति की भावना को मजबूत करना है।
उनकी इस पहल की खास बात यह है कि इसमें किसी बड़े मंच, आयोजन या भारी-भरकम व्यवस्था की जरूरत नहीं होती। एक पतंग, तिरंगा और देश के प्रति गहरा सम्मान—इन्हीं के सहारे शिव इंदौर के आसमान को राष्ट्रभक्ति के रंग में रंग देते हैं।
जब तिरंगा हवा में ऊंचा उठता है तो आसपास मौजूद लोगों के चेहरे पर उत्साह दिखाई देता है। बच्चे विशेष रूप से आसमान की ओर देखते हुए इस दृश्य को कौतूहल से निहारते हैं। कई लोगों के लिए यह केवल पतंग उड़ाने का दृश्य नहीं, बल्कि राष्ट्रीय पर्व को अपने तरीके से मनाने की प्रेरणादायी मिसाल बन जाता है।

ढीकोला में भी गूंजा गर्व
शिव माली मूल रूप से शाहपुरा तहसील के ढीकोला गांव के निवासी हैं। इंदौर में रहकर राष्ट्रीय पर्वों पर उनकी यह अनूठी पहल अब उनके गांव तक भी गर्व और उत्साह का विषय बन गई है। ढीकोला के लोगों के लिए यह खुशी की बात है कि उनके गांव का एक व्यक्ति देशभक्ति के इस अनोखे अंदाज से अलग पहचान बना रहा है।
गांव में भी उनके इस प्रयास को लेकर उत्साह देखा गया। ग्रामीणों का कहना है कि देशभक्ति के लिए बड़े आयोजन जरूरी नहीं, मन में जज्बा हो तो एक साधारण प्रयास भी लोगों के दिलों को छू सकता है। शिव का तिरंगा इसी भावना का प्रतीक बन गया है।

तिरंगा सिर्फ झंडा नहीं, भावनाओं की पहचान
15 अगस्त पर देशभर में लाखों तिरंगे फहराए जाते हैं, लेकिन हर तिरंगे के पीछे एक ही भावना होती है—राष्ट्र के प्रति सम्मान और गर्व। शिव माली का प्रयास इसी भावना को एक अलग रूप देता है। पतंग के सहारे आसमान में पहुंचता तिरंगा यह संदेश देता है कि देशभक्ति की कोई सीमा नहीं होती। इसके लिए जरूरी है तो केवल राष्ट्र के प्रति समर्पण और सम्मान का भाव।
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जब देश आजादी के वीरों के बलिदान को याद करता है, तब आसमान में लहराता यह तिरंगा भी उसी गौरवगाथा की याद दिलाता है। हवा के हर झोंके के साथ फहराता तिरंगा मानो कहता नजर आता है—देश की आन, बान और शान हमेशा ऊंची रहे।
शिव माली की यह अनोखी पहल राष्ट्रीय पर्व की खुशियों को एक अलग रंग देती है। इंदौर के आसमान में करीब 1000 फीट की ऊंचाई पर लहराता तिरंगा और नीचे गूंजता ‘भारत माता की जय’ का जयघोष यह एहसास कराता है कि देशभक्ति केवल समारोहों और मंचों तक सीमित नहीं है। यह उस भावना का नाम है, जो दिल में हो तो पतंग की डोर भी राष्ट्रध्वज को आसमान की ऊंचाइयों तक पहुंचाने का माध्यम बन सकती है।
ढीकोला के शिव माली की यह तिरंगा उड़ान अब एक संदेश बन चुकी है—देशभक्ति का जज्बा दिल में हो तो आसमान भी छोटा पड़ जाता है।




