शिव भक्ति में झूम उठा शाहपुरा, हर-हर महादेव के जयकारों से गूंजा पिवनिया तालाब

शाहपुरा। श्रावण मास की पावन बेला में जब शिवालयों में हर-हर महादेव के जयकारे गूंजते हैं तो माहौल में भक्ति की ऐसी मिठास घुल जाती है कि हर कोई भोलेनाथ की भक्ति में रम जाता है। सावन के इसी आध्यात्मिक रंग में शाहपुरा का पिवनिया तालाब क्षेत्र भी सोमवार को शिवमय नजर आया। कहीं महादेव का जलाभिषेक हुआ तो कहीं भजन-कीर्तन की स्वर लहरियों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। महिलाओं ने भजनों पर नृत्य कर शिव भक्ति का रंग जमाया तो पुरुषों ने अभिषेक और प्रसादी वितरण की जिम्मेदारी संभाली।
पिवनिया तालाब के सामने स्थित शिव शक्ति धर्मशाला के समीप राधा-कृष्ण मंदिर एवं मंशापूर्ण महादेव मंदिर में खटीक समाज की ओर से धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से भगवान शिव का जलाभिषेक कर राधा-कृष्ण की पूजा-अर्चना की। इसके बाद भोलेनाथ को खीर-मालपुए का भोग लगाया गया। प्रसाद वितरण में समाज के सभी समाजजनों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी निभाई।
भजनों पर झूमीं महिलाएं, गूंजता रहा भोले का नाम
कार्यक्रम की सबसे खास बात महिलाओं की सक्रिय भागीदारी रही। दिनभर महिलाओं ने भगवान शिव एवं राधा-कृष्ण के भजन गाकर वातावरण को भक्तिरस से सराबोर कर दिया। भजनों की धुन पर महिलाएं झूमती और नृत्य करती नजर आईं। कभी ‘भोलेनाथ’ के जयकारे गूंजे तो कभी राधा-कृष्ण की भक्ति में श्रद्धालु भाव-विभोर दिखाई दिए।
श्रावण मास में शिव आराधना का विशेष महत्व माना जाता है। ऐसे में महिलाओं की भक्ति और सामूहिक भजन-कीर्तन ने आयोजन को धार्मिक उत्सव का रूप दे दिया। महिलाओं ने जहां भजन-कीर्तन की कमान संभाली, वहीं पुरुषों ने महादेव का जलाभिषेक कर प्रसाद वितरण की व्यवस्थाएं संभालीं।
शाम को खटीक समाज के सभी समाजजनों के लिए भोजन-प्रसादी का आयोजन हुआ। बड़ी संख्या में समाजजन एकत्र हुए और सामूहिक रूप से प्रसादी ग्रहण कर सामाजिक एकता एवं भाईचारे का संदेश दिया।
माणा घाट पर भी शिव भक्ति का रंग, पांच जोड़ों ने किया पूजन
इधर पिवनिया तालाब के किनारे स्थित माणा घाट शिव मंदिर में भी श्रावण मास के चलते दिनभर धार्मिक माहौल बना रहा। मंदिर के पुजारी प्रदीप शर्मा ने बताया कि सुबह से ही महिलाओं द्वारा भजन-कीर्तन का दौर चलता रहा। शिव भक्ति में डूबी महिलाएं भजनों पर नृत्य करती नजर आईं और पूरा मंदिर परिसर भोलेनाथ के जयकारों से गूंज उठा।
मंदिर में महादेव के समक्ष पांच जोड़ों ने बैठकर पूजा-अर्चना एवं धार्मिक अनुष्ठान में भाग लिया। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि एवं परिवार की खुशहाली की कामना की।
सावन में शिव भक्ति बनी सामाजिक एकता की डोर
शाम को माणा घाट शिव मंदिर में भी भक्तों के लिए भोजन-प्रसादी का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से भोजन-प्रसादी ग्रहण की और धार्मिक आयोजन का आनंद लिया। दिनभर चले भजन-कीर्तन और पूजा-अर्चना के बाद शाम को सामूहिक प्रसादी ने आयोजन को पूर्णता प्रदान की।
श्रावण मास केवल भगवान शिव की आराधना का महीना नहीं, बल्कि सामाजिक मेल-जोल, सेवा और सद्भाव का भी पर्व बन जाता है। पिवनिया तालाब क्षेत्र में हुए दोनों धार्मिक आयोजनों ने यही संदेश दिया कि जब समाज एकजुट होकर भगवान भोलेनाथ की भक्ति करता है तो धर्म के साथ सामाजिक रिश्तों की डोर भी मजबूत होती है।
शिव महिमा की गूंज, भजनों की मधुर धुन और प्रसादी की खुशबू से पिवनिया तालाब क्षेत्र देर शाम तक भक्तिमय रहा। श्रद्धालुओं के चेहरों पर भक्ति का भाव और जुबां पर एक ही उद्घोष सुनाई देता रहा—“हर-हर महादेव… बम-बम भोले!”




