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शाहपुरा की प्रतिभा का राष्ट्रीय गौरव : सेवानिवृत्त आईएफएस परेश कुमार शर्मा की पुस्तक का तेलंगाना के राज्यपाल ने किया लोकार्पण

वन संरक्षण के तीन दशक के अनुभवों को समेटे संस्मरण 'फुटप्रिंट्स इन द फॉरेस्ट्स' बनी अमेज़न की बेस्टसेलर, पर्यावरण संरक्षण के लिए बढ़े बजट की उठाई मांग

मूलचन्द पेसवानी

शाहपुरा संवाद। किसी भी नगर के लिए यह गर्व का विषय होता है जब उसकी मिट्टी में पले-बढ़े व्यक्तित्व अपनी प्रतिभा और कर्मनिष्ठा से राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाते हैं। शाहपुरा के लिए ऐसा ही गौरवपूर्ण क्षण उस समय आया, जब नगर के मूल निवासी एवं भारतीय वन सेवा (आईएफएस) के सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी परेश कुमार शर्मा द्वारा लिखित संस्मरण “Footprints in the Forests – Memoirs of a Forester” का औपचारिक लोकार्पण तेलंगाना के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने हैदराबाद स्थित लोक भवन में किया।

यह केवल एक पुस्तक का विमोचन नहीं था, बल्कि भारतीय वन सेवा के तीन दशक से अधिक लंबे अनुभव, संघर्ष, चुनौतियों और उपलब्धियों को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास भी था। इस अवसर पर उपस्थित गणमान्य अतिथियों ने पुस्तक की विषयवस्तु, उसकी उपयोगिता तथा लेखक के दीर्घ प्रशासनिक अनुभव की मुक्तकंठ से सराहना की।

लोकार्पण समारोह में एसआरएएस पब्लिश की श्रीमती सुप्रिया भाले राव, प्रख्यात वन अधिकारी डॉ. मनोरंजन भांजा (आईएफएस, सेवानिवृत्त) तथा मनोवैज्ञानिक परामर्शदाता सुश्री नेहा व्यास भी विशेष रूप से उपस्थित रहीं। सभी ने पुस्तक को वन प्रशासन, पर्यावरण संरक्षण और नेतृत्व के क्षेत्र में कार्य करने वाले अधिकारियों तथा विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ बताया।

पुस्तक के लेखक परेश कुमार शर्मा ने अपने संबोधन में बताया कि “Footprints in the Forests – Memoirs of a Forester” उनके 30 वर्षों से अधिक लंबे वन सेवा जीवन के अनुभवों, चुनौतियों, निर्णयों और सीख का सार है। उन्होंने कहा कि पुस्तक का उद्देश्य केवल संस्मरण प्रस्तुत करना नहीं, बल्कि सेवारत वन अधिकारियों, नव नियुक्त प्रशासनिक अधिकारियों, अन्य सिविल सेवकों, प्रकृति प्रेमियों तथा संघ लोक सेवा आयोग एवं राज्य लोक सेवा आयोग की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को व्यवहारिक अनुभवों से परिचित कराना भी है। उनका मानना है कि प्रशासनिक सेवा केवल नियमों का पालन भर नहीं, बल्कि प्रकृति, समाज और आने वाली पीढ़ियों के प्रति उत्तरदायित्व निभाने का भी माध्यम है।

समारोह के दौरान श्री शर्मा ने राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल से विशेष आग्रह किया कि राष्ट्रीय वन नीति तथा जलवायु परिवर्तन के संबंध में भारत द्वारा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर की गई प्रतिबद्धताओं को ध्यान में रखते हुए वन एवं प्रकृति संरक्षण को नीति-निर्माण में सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य की पीढ़ियों को स्वच्छ वायु, निर्मल जल और संतुलित पर्यावरण देना है तो वन क्षेत्र के लिए बजटीय आवंटन में उल्लेखनीय वृद्धि आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि वन केवल पेड़ों का समूह नहीं, बल्कि समस्त जीव-जंतुओं, जैव विविधता और मानव सभ्यता के अस्तित्व का आधार हैं। आज जब पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन, बढ़ते तापमान और पर्यावरणीय असंतुलन जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है, तब वन संरक्षण केवल सरकारी दायित्व नहीं बल्कि प्रत्येक नागरिक की नैतिक जिम्मेदारी भी है।

समारोह में उपस्थित अतिथियों ने भी इस बात पर बल दिया कि अनुभवी अधिकारियों द्वारा अपने अनुभवों का दस्तावेजीकरण नई पीढ़ी के लिए अमूल्य धरोहर सिद्ध होता है। ऐसी पुस्तकें केवल प्रशासनिक अनुभवों का संकलन नहीं होतीं, बल्कि वे नेतृत्व, निर्णय क्षमता, संकट प्रबंधन और मानवीय मूल्यों का भी जीवंत पाठ पढ़ाती हैं।

शाहपुरा के मूल निवासी परेश कुमार शर्मा की यह उपलब्धि नगर के लिए विशेष गर्व का विषय है। उन्होंने भारतीय वन सेवा में रहते हुए अनेक महत्वपूर्ण दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया और अंततः प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) एवं हेड ऑफ फॉरेस्ट फोर्स, तेलंगाना जैसे सर्वोच्च पद पर अपनी सेवाएँ दीं। सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद भी उनका प्रकृति संरक्षण, पर्यावरण जागरूकता और प्रशासनिक अनुभवों को समाज तक पहुँचाने का अभियान निरंतर जारी है।

उल्लेखनीय है कि “Footprints in the Forests – Memoirs of a Forester” को पाठकों का भरपूर स्नेह मिला है और यह अमेज़न पर अपनी श्रेणी की सर्वाधिक बिकने वाली पुस्तकों में शामिल हो चुकी है। यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि पुस्तक में प्रस्तुत अनुभव केवल वन अधिकारियों के लिए ही नहीं, बल्कि व्यापक समाज और प्रशासनिक जगत के लिए भी समान रूप से प्रेरणादायक हैं।

शाहपुरा की इस प्रतिभा ने एक बार फिर यह सिद्ध किया है कि छोटे नगरों से निकलने वाली प्रतिभाएँ राष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बनाने में पूरी तरह सक्षम हैं। परेश कुमार शर्मा की यह उपलब्धि न केवल नगरवासियों के लिए गौरव का विषय है, बल्कि युवाओं के लिए भी प्रेरणा है कि समर्पण, ईमानदारी और कर्मनिष्ठा के बल पर किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त की जा सकती है।

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