Welcome to शाहपुरा संवाद   Click to listen highlighted text! Welcome to शाहपुरा संवाद
BHILWARAE-Paperराजस्थानरामस्नेहीलोकल न्यूज़शाहपुरा

भगवान से रिश्ता जोड़ लिया तो मोक्ष की राह कोई नहीं रोक सकता

आचार्य पुलकसागर बोले—तीर्थंकरों के दास और भक्त भी बन जाते हैं मोक्षगामी, 16 से दशलक्षण पर्व की साधना

भीलवाड़ा, 7 सितंबर। संसार में रिश्ते समय देने से मजबूत होते हैं और समय नहीं देने पर धीरे-धीरे कमजोर पड़ जाते हैं। यही बात भगवान और भक्त के रिश्ते पर भी लागू होती है। जो व्यक्ति तीर्थंकरों से सच्चा रिश्ता जोड़ लेता है, उसका कल्याण निश्चित है। भगवान से स्वामी-सेवक, दास और भक्त का रिश्ता जोड़कर भी मनुष्य उनके निकट पहुंच सकता है और मोक्ष की राह पर आगे बढ़ सकता है।

यह विचार भीलवाड़ा में पहली बार चातुर्मास कर रहे राष्ट्र संत मनोज्ञाचार्य पुलकसागरजी महाराज ने सोमवार को शास्त्रीनगर स्थित सूर्यमहल में चातुर्मासिक प्रवचन के दौरान व्यक्त किए। प्रवचन का आयोजन श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट, मैन सेक्टर शास्त्रीनगर के तत्वावधान में सकल दिगम्बर जैन समाज की ओर से किया गया।

आचार्यश्री ने कहा कि जिस दिन भगवान के प्रति निर्मल श्रद्धा पैदा हो जाएगी, उसी दिन सम्यक दर्शन की शुरुआत हो जाएगी। उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि 24 घंटे के जीवन में अरिहंत और तीर्थंकरों के लिए कुछ समय अवश्य निकालें। भगवान के लिए समय निकालेंगे तो उनसे रिश्ता बना रहेगा और जब भगवान से रिश्ता मजबूत रहेगा तो संसार की कोई शक्ति मोक्ष की यात्रा में बाधा नहीं बन सकती।

समय नहीं देंगे तो रिश्ते में आएगी दूरी

आचार्य पुलकसागरजी ने कहा कि संसार में जिस व्यक्ति को समय नहीं दिया जाता, उससे रिश्ता धीरे-धीरे बिगड़ जाता है। इसी तरह भगवान को भी जीवन में समय देना जरूरी है। केवल मंदिर जाना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि भगवान के गुणों को जानना, उनके बताए मार्ग को समझना और उसे जीवन में उतारना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि तीर्थंकरों के साथ देवता भी हमजोली बनकर रहते हैं। मनुष्य भी भक्ति के माध्यम से भगवान से अपना रिश्ता जोड़ सकता है। जो भगवान का दास और सेवक बन जाता है, वह भी मोक्षगामी बन जाता है। भगवान केवल अपने रिश्तेदारों को ही नहीं, बल्कि सच्चे भक्तों और सेवकों को भी तार देते हैं।

तीर्थंकरों का सुख-वैभव सर्वोत्कृष्ट

आचार्यश्री ने कहा कि तीर्थंकरों का सुख, वैभव और विचार हर दृष्टि से सर्वोत्कृष्ट होते हैं। जिस परिवार में तीर्थंकर का जन्म होता है, वह मोक्षगामी संस्कारों वाला परिवार होता है। अयोध्या जैसी पावन नगरी तीर्थंकरों की जन्मभूमि रही है।

उन्होंने कहा कि मोक्ष का मार्ग तीर्थंकरों का मार्ग है, क्योंकि सामान्य मनुष्य उनके जैसी कठोर साधना करने में सक्षम नहीं होता। फिर भी मनुष्य के लिए तीर्थंकरों को जानना और उनके जीवन से प्रेरणा लेना अत्यंत आवश्यक है।

आचार्य पुलकसागरजी ने कहा कि तीर्थंकर अनंत गुणों से युक्त होते हैं और सम्यक ज्ञान, सम्यक दर्शन एवं सम्यक चारित्र के आराधक होते हैं। उनका शरीर भी सामान्य मनुष्य की तुलना में उच्च कोटि का माना गया है।

सीए, डॉक्टर और इंजीनियर बनना अंतिम लक्ष्य नहीं

आचार्यश्री ने आज की युवा पीढ़ी और अभिभावकों को जीवन के वास्तविक लक्ष्य की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि सीए, इंजीनियर, डॉक्टर या व्यवसायी बनना जीवन का अंतिम लक्ष्य नहीं है। ये सभी जीवन जीने के साधन हैं। मनुष्य का मूल उद्देश्य मोक्ष की प्राप्ति होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि हम जीवन में धन, संपत्ति और वैभव पाने के सपने देखते हैं, जबकि तीर्थंकर वैभव और संपदा के लिए पुरुषार्थ नहीं करते। वे भगवान बनने के लिए पुरुषार्थ करते हैं और जब भगवान बनते हैं तो वैभव उनके चरणों में आकर खड़ा हो जाता है।

उन्होंने कहा कि मनुष्य को संसार में जितनी रिद्धि-सिद्धि प्राप्त हो सकती है, वह सब तीर्थंकरों को प्राप्त होती है। संसार का ऐसा कोई सुख नहीं है जो तीर्थंकरों को उपलब्ध न हो, लेकिन वे इन सुख-सुविधाओं में लीन होने के बजाय साधना के मार्ग पर चलते हैं और अंततः मोक्ष प्राप्त करते हैं।

16 से होगी पर्युषण-दशलक्षण पर्व की साधना

चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी ने बताया कि आचार्य पुलकसागर महाराज के सानिध्य में सूर्यमहल में 16 से 25 सितंबर तक पर्युषण (दशलक्षण) पर्व की विशेष साधना होगी। इसी अवधि में दस दिवसीय ‘पाप नाशनम शिविर’ का आयोजन भी किया जाएगा। शिविर में भाग लेने के लिए अब तक सैकड़ों श्रावक-श्राविकाएं पंजीयन करा चुके हैं।

प्रवचन से पूर्व दीप प्रज्वलन, पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट का सौभाग्य कमलादेवी, राजेन्द्र, सौरभ, साहिल एवं दुर्लभ गंगवाल परिवार ने प्राप्त किया।

प्रतिदिन सुबह प्रवचन, शाम को आनंद यात्रा

चातुर्मास समिति के संयोजक मनीष शाह एवं सह संयोजक लोकेश अजमेरा ने बताया कि सूर्यमहल में प्रतिदिन सुबह 8.30 से 10 बजे तक चातुर्मासिक प्रवचन हो रहे हैं। वहीं शाम 7 से 8 बजे तक आनंद यात्रा एवं आरती का आयोजन किया जा रहा है। इसमें शहर के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर धर्मलाभ ले रहे हैं।

रिपोर्ट : मूलचन्द पेसवानी

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!
Click to listen highlighted text!