गुरु ही जीवन का सच्चा पथप्रदर्शक, उनके बताए मार्ग पर चलकर ही मिलती है सफलता : सत्यनारायण कुमावत
आलोक सेंट्रल स्कूल में श्रद्धा, सम्मान और उत्साह के साथ मनाया गया गुरु पूर्णिमा महोत्सव, पौधारोपण कर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

शाहपुरा। भारतीय संस्कृति में गुरु को ईश्वर से भी श्रेष्ठ माना गया है। गुरु ही वह दिव्य शक्ति है, जो अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाती है और जीवन को सही दिशा प्रदान करती है। इसी आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा को आत्मसात करते हुए शाहपुरा स्थित आलोक सेंट्रल स्कूल में गुरु पूर्णिमा महोत्सव श्रद्धा, सम्मान और उल्लासपूर्ण वातावरण में मनाया गया। पूरे विद्यालय परिसर में गुरु वंदना, भारतीय संस्कृति और गुरु-शिष्य परंपरा की अनुपम छटा देखने को मिली। विद्यार्थियों ने अपने गुरुजनों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए उन्हें भारतीय संस्कारों का सच्चा वाहक बताया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी शाहपुरा सत्यनारायण कुमावत थे। विद्यालय पहुंचने पर विद्यालय परिवार द्वारा उनका आत्मीय स्वागत किया गया। दीप प्रज्वलन एवं मां सरस्वती के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। इसके पश्चात विद्यार्थियों ने गुरु वंदना प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। विद्यालय परिसर गुरु महिमा के जयघोष और प्रेरणादायी संदेशों से गुंजायमान रहा।

मुख्य अतिथि सत्यनारायण कुमावत ने अपने प्रेरक संबोधन में कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोच्च है। गुरु केवल शिक्षा देने वाला शिक्षक नहीं, बल्कि जीवन को संस्कारित करने वाला निर्माता होता है। उन्होंने कहा कि शास्त्रों में गुरु को ब्रह्मा, विष्णु और महेश का स्वरूप माना गया है। गुरु ही व्यक्ति के भीतर छिपी प्रतिभा को पहचानकर उसे तराशता है और सफलता की राह दिखाता है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि माता-पिता जीवन देते हैं, लेकिन गुरु जीवन जीने की कला सिखाते हैं। इसलिए प्रत्येक विद्यार्थी का पहला कर्तव्य अपने गुरुजनों का सम्मान करना तथा उनके बताए आदर्शों पर चलना होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धी दौर में केवल पुस्तकीय ज्ञान ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि नैतिक शिक्षा, अनुशासन, संस्कार और मानवीय मूल्यों का समावेश भी आवश्यक है। इन सभी गुणों का विकास गुरु के मार्गदर्शन से ही संभव है। उन्होंने विद्यार्थियों को लक्ष्य निर्धारित कर निरंतर परिश्रम करने, समय का सदुपयोग करने तथा शिक्षा के साथ-साथ चरित्र निर्माण पर भी विशेष ध्यान देने की प्रेरणा दी।
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर विद्यालय में विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के बीच आत्मीय संवाद का वातावरण देखने को मिला। विद्यार्थियों ने अपने गुरुजनों के प्रति सम्मान प्रकट करते हुए उनका आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर विद्यालय परिवार ने गुरु-शिष्य परंपरा को भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर बताते हुए इसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प भी व्यक्त किया।

कार्यक्रम के उपरांत मुख्य अतिथि सत्यनारायण कुमावत, विद्यालय संचालक वीरेन्द्र कुमार व्यास एवं विद्यालय परिवार ने विद्यालय परिसर में पौधारोपण किया। पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण, हरित परिसर और प्रकृति संवर्धन का संदेश दिया गया। मुख्य अतिथि ने कहा कि जिस प्रकार गुरु जीवन को नई दिशा देते हैं, उसी प्रकार एक पौधा भविष्य की पीढ़ियों को स्वच्छ वातावरण और जीवनदायिनी ऊर्जा प्रदान करता है। प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में कम से कम एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल करने का संकल्प लेना चाहिए।
विद्यालय संचालक वीरेन्द्र कुमार व्यास ने मुख्य अतिथि का स्वागत करते हुए कहा कि गुरु पूर्णिमा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि गुरुजनों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और सम्मान व्यक्त करने का अवसर है। उन्होंने कहा कि आलोक सेंट्रल स्कूल में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के साथ-साथ भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और संस्कारों को भी समान महत्व दिया जाता है। विद्यालय का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल शैक्षणिक रूप से सक्षम बनाना ही नहीं, बल्कि उन्हें एक जिम्मेदार, संस्कारित और राष्ट्रहित के प्रति समर्पित नागरिक बनाना भी है।

उन्होंने कार्यक्रम में पधारे मुख्य अतिथि सहित सभी अतिथियों, अभिभावकों एवं विद्यालय परिवार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में गुरु के प्रति सम्मान, अनुशासन और भारतीय संस्कृति के प्रति गौरव की भावना विकसित करते हैं। कार्यक्रम का सफल संचालन विद्यालय परिवार के सहयोग से संपन्न हुआ।
इस अवसर पर सुशील कुमार गोड़, दुर्गालाल धाकड़, शैलेंद्र सिंह राणावत, आरती शर्मा, सुषमा सेन, विष्णु जांगिड़, राजेश सेन, मुकेश तेली, गुड्डी बानो, किशनलाल धाकड़, मुरली बंजारा, देव किशन कोली, गौतम तिवाड़ी, अंजली शर्मा, चैत (चेस्ट) शर्मा, अंशिका चेचाणी, आयुष आचार्य, सीताराम गुर्जर, धीरेंद्र पांचाल, खुशबू राठौड़, स्नेहा सेन, नैना पांचाल, फरजाना बानो, सुमन यादव, किरण जांगिड़, पायल नायक, रेखा प्रजापत, दिव्या श्रीवास्तव, हेम कंवर, सुचिता कांटिया सहित विद्यालय का समस्त शिक्षण एवं गैर-शिक्षण स्टाफ उपस्थित रहा।
गुरु पूर्णिमा महोत्सव श्रद्धा, संस्कार और पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों के मन में गुरु के प्रति आदर, भारतीय संस्कृति के प्रति गौरव और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी की भावना को और अधिक सुदृढ़ किया। विद्यालय परिसर में पूरे आयोजन के दौरान उत्साह, अनुशासन और सकारात्मक ऊर्जा का वातावरण बना रहा, जिसने उपस्थित सभी लोगों के मन पर गहरी छाप छोड़ी।




