
शाहपुरा। मूलचन्द पेसवानी
नगर के इंडियन पब्लिक स्कूल परिसर में शुक्रवार को भगवान श्री जगन्नाथ की पावन रथयात्रा धार्मिक आस्था, भारतीय संस्कृति और बाल उत्साह का ऐसा अद्भुत संगम लेकर आई, जिसने पूरे विद्यालय परिसर को भक्तिमय वातावरण में सराबोर कर दिया। “जय जगन्नाथ”, “हरि बोल” और “जय श्रीकृष्ण” के गगनभेदी जयघोषों के बीच जब भगवान श्री जगन्नाथ का सुसज्जित रथ विद्यालय परिसर में आगे बढ़ा तो ऐसा प्रतीत हुआ मानो स्वयं भगवान अपने भक्तों को दर्शन देने निकल पड़े हों।
रंग-बिरंगे परिधानों में सजे-धजे विद्यार्थियों, पारंपरिक वेशभूषा में उपस्थित शिक्षकों और विद्यालय परिवार की उत्साहपूर्ण सहभागिता ने इस आयोजन को अविस्मरणीय बना दिया। चारों ओर भक्ति संगीत, पुष्पवर्षा और श्रद्धा की अनुपम छटा बिखरी हुई थी। छोटे-छोटे बच्चों के चेहरे पर उमंग, उत्साह और भगवान के प्रति अटूट आस्था साफ झलक रही थी। हर कोई भगवान श्री जगन्नाथ के रथ की रस्सी को स्पर्श कर स्वयं को धन्य महसूस कर रहा था।

कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय की प्राचार्या द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर भगवान श्री जगन्नाथ के समक्ष पूजा-अर्चना के साथ किया गया। इसके पश्चात उन्होंने विधिवत भगवान के रथ की रस्सी खींचकर रथयात्रा का शुभारंभ किया। जैसे ही रथ आगे बढ़ा, पूरा विद्यालय “जय जगन्नाथ” के जयकारों से गूंज उठा और वातावरण पूर्णतः आध्यात्मिक हो गया।
विद्यालय परिसर को इस अवसर पर विशेष रूप से आकर्षक ढंग से सजाया गया था। रंगोली, पुष्प सज्जा, भगवा ध्वज और सांस्कृतिक प्रतीकों से सुसज्जित वातावरण श्रद्धालुओं का मन मोह रहा था। भगवान श्री जगन्नाथ, बलभद्र एवं माता सुभद्रा की सुसज्जित प्रतिमाओं ने सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। विद्यार्थियों ने पूरे मार्ग में भजन-कीर्तन करते हुए रथयात्रा का स्वागत किया तथा भक्तिभाव से भगवान का गुणगान किया।
इस अवसर पर विद्यालय के विद्यार्थियों का उत्साह देखते ही बन रहा था। नन्हे-मुन्ने बच्चों ने पूरे मनोयोग से रथयात्रा में भाग लिया। किसी के हाथ में पुष्प थे तो कोई भगवान के जयकारे लगा रहा था। अनेक विद्यार्थियों ने पारंपरिक भारतीय वेशभूषा धारण कर आयोजन की गरिमा को और बढ़ाया। बच्चों के चेहरों पर दिखाई दे रही मासूम मुस्कान और श्रद्धा इस बात का प्रमाण थी कि विद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र ही नहीं, बल्कि संस्कारों की पाठशाला भी है।
रथयात्रा के दौरान विद्यालय परिसर भक्ति गीतों की मधुर स्वर लहरियों से गूंजता रहा। “जय जगन्नाथ स्वामी”, “हरे राम-हरे कृष्ण” और अन्य भजनों पर विद्यार्थी एवं शिक्षक भाव-विभोर होकर झूमते नजर आए। पूरे आयोजन में अनुशासन, श्रद्धा और उत्साह का सुंदर समन्वय देखने को मिला।
विद्यालय प्रबंधन ने कहा कि भारतीय संस्कृति में भगवान श्री जगन्नाथ की रथयात्रा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, सेवा, समानता और मानवता का संदेश देने वाला महान पर्व है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, धार्मिक परंपराओं और नैतिक मूल्यों से जोड़ने का सार्थक प्रयास किया जाता है। विद्यालय का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उन्हें भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों से भी परिचित कराना है।
प्रबंधन ने कहा कि जब बच्चे इस प्रकार के आयोजनों में स्वयं भाग लेते हैं तो उनके भीतर सहयोग, अनुशासन, सेवा, सामूहिकता, श्रद्धा और सांस्कृतिक चेतना का स्वाभाविक विकास होता है। यही संस्कार आगे चलकर उन्हें एक जिम्मेदार, संवेदनशील और आदर्श नागरिक बनने की प्रेरणा देते हैं।
कार्यक्रम के दौरान शिक्षक-शिक्षिकाओं ने भी विद्यार्थियों को भगवान श्री जगन्नाथ की रथयात्रा के धार्मिक, सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक महत्व की जानकारी दी। बच्चों ने बड़े उत्साह के साथ इस परंपरा को समझा और भारतीय संस्कृति के प्रति अपनी जिज्ञासा व्यक्त की। पूरे आयोजन में विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी ने यह स्पष्ट कर दिया कि नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने के लिए उत्साहित है।
रथयात्रा के समापन पर विद्यालय परिवार ने भगवान श्री जगन्नाथ की आरती कर सभी के सुख, शांति, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना की। श्रद्धा, भक्ति और उल्लास से सराबोर यह आयोजन विद्यालय परिवार के लिए एक यादगार आध्यात्मिक अनुभव बन गया। कार्यक्रम के समापन के बाद भी विद्यार्थियों के मुख से “जय जगन्नाथ” के जयघोष लगातार गूंजते रहे और पूरा परिसर देर तक भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा।
इंडियन पब्लिक स्कूल में आयोजित भगवान श्री जगन्नाथ की यह भव्य रथयात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं रही, बल्कि भारतीय संस्कृति, अध्यात्म, नैतिक मूल्यों और सामाजिक एकता का जीवंत उत्सव बनकर सभी के हृदय में अविस्मरणीय छाप छोड़ गई।




