Welcome to शाहपुरा संवाद   Click to listen highlighted text! Welcome to शाहपुरा संवाद
BHILWARAE-Paperधर्मलोकल न्यूज़शाहपुरा

शाहपुरा की आध्यात्मिक विरासत का किया गुणगान, शिव महापुराण कथा में गूंजा ‘जय शंभू’ का उद्घोष

कथावाचक गजेन्द्र गोपाल शास्त्री बोले— पूर्वजों की तपस्या से पवित्र बनी है शाहपुरा की धरती, सनातन संस्कृति के संरक्षण का लिया जाए संकल्प

शाहपुरा।
माहेश्वरी पंचायत भवन, सदर बाजार में आयोजित नौ दिवसीय श्री शिव महापुराण कथा के चतुर्थ दिवस श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना का अनुपम संगम देखने को मिला। प्रख्यात कथावाचक पूज्य श्री गजेन्द्र गोपाल जी शास्त्री ने भगवान शिव की महिमा, निष्काम भक्ति, सनातन संस्कृति के मूल स्वरूप तथा शाहपुरा की गौरवशाली आध्यात्मिक विरासत पर सारगर्भित एवं प्रेरणादायी प्रवचन दिए। कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और पूरा पांडाल बार-बार “जय शंभू” के जयघोष से गुंजायमान होता रहा।

अपने उद्बोधन में पूज्य श्री शास्त्री ने कहा कि शाहपुरा केवल एक नगर नहीं, बल्कि ऋषि-मुनियों, संतों और पूर्वजों की तपस्या से पवित्र हुई आध्यात्मिक धरोहर है। यहां के प्राचीन मंदिर, हनुमानजी के दिव्य विग्रह, सरोवर क्षेत्र के देवस्थान और नगर की धार्मिक संरचना पूर्वजों की दूरदृष्टि, लोककल्याण और धर्मनिष्ठ जीवन दर्शन की अमूल्य पहचान हैं। उन्होंने कहा कि देश के अनेक प्रसिद्ध तीर्थों के दर्शन करने के बाद भी शाहपुरा जैसी संतुलित और सुव्यवस्थित आध्यात्मिक व्यवस्था विरले ही देखने को मिलती है।

उन्होंने कहा कि पूर्वजों ने नगर के प्रत्येक क्षेत्र में देवस्थानों की स्थापना केवल पूजा-अर्चना के लिए नहीं, बल्कि समाज में सुख, शांति, सद्भाव और आध्यात्मिक ऊर्जा का निरंतर प्रवाह बनाए रखने के उद्देश्य से की थी। यदि आज समाज अनेक प्रकार की समस्याओं और विपत्तियों का सामना कर रहा है, तो यह हमारी सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण और सम्मान के प्रति गंभीर आत्ममंथन का विषय है।

महाराज श्री ने श्रद्धालुओं का आह्वान किया कि वे मंदिरों, देवस्थानों, संत-महात्माओं, ब्राह्मणों तथा गौ माता के प्रति सदैव श्रद्धा और सम्मान का भाव रखें। उन्होंने कहा कि भगवान शिव निर्गुण भी हैं और सगुण भी। प्रत्येक व्यक्ति अपनी परंपरा और श्रद्धा के अनुसार ईश्वर की आराधना कर सकता है, किन्तु किसी भी परिस्थिति में देव, धर्म और संतों की निंदा नहीं करनी चाहिए। यही सनातन संस्कृति का मूल संदेश है।

शिव महापुराण की महिमा का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि शिव कथा का वक्ता, श्रद्धापूर्वक श्रवण करने वाला श्रोता और जिज्ञासापूर्वक प्रश्न पूछने वाला व्यक्ति—तीनों तीर्थ के समान पवित्र हो जाते हैं। निष्काम भाव से शिव महापुराण का श्रवण आत्मशुद्धि, मन की निर्मलता और जीवन में आध्यात्मिक उन्नति का सर्वोत्तम साधन है। कथा का वास्तविक फल तभी प्राप्त होता है, जब वक्ता, श्रोता और प्रश्नकर्ता तीनों अहंकार और स्वार्थ का त्याग कर पूर्ण श्रद्धा से कथा से जुड़ें।

प्रवचन के समापन पर पूज्य श्री शास्त्री ने श्रद्धालुओं से अपने भीतर स्थित शिव स्वरूप को पहचानने और धर्म, सेवा तथा सदाचार के मार्ग पर चलने का आह्वान किया। उनके भावपूर्ण “जय शंभू” उद्घोष के साथ पूरा पांडाल भक्तिमय वातावरण में डूब गया।

कथा के अंत में भगवान भोलेनाथ की विधिवत महाआरती की गई। उपस्थित श्रद्धालुओं ने विश्व शांति, मानव कल्याण, सुख-समृद्धि, राष्ट्र की उन्नति तथा सनातन धर्म की निरंतर प्रगति के लिए सामूहिक प्रार्थना की। पूरे आयोजन में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास का अनुपम वातावरण बना रहा।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!
Click to listen highlighted text!